पानी के लिए कहीं हाहाकार, तो कहीं पानी बह रहा बेकार

Updated at : 30 Apr 2019 7:11 AM (IST)
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पानी के लिए कहीं हाहाकार, तो कहीं पानी बह रहा बेकार

पूर्णिया : कोसी बेसिन के आंचल में अवस्थित पूर्णिया में भौगर्भिक जल के लिए महज 12 से 15 फुट भूपर्पटी को वेधना होता है. इसके बावजूद भी पूर्णिया पानी के लिए पानी-पानी है. यहां गांव क्या शहर में भी शुद्ध जल लोगों को नसीब नहीं है. पीएचइडी विभाग ने तो जलमीनार बना लिया है मगर […]

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पूर्णिया : कोसी बेसिन के आंचल में अवस्थित पूर्णिया में भौगर्भिक जल के लिए महज 12 से 15 फुट भूपर्पटी को वेधना होता है. इसके बावजूद भी पूर्णिया पानी के लिए पानी-पानी है. यहां गांव क्या शहर में भी शुद्ध जल लोगों को नसीब नहीं है. पीएचइडी विभाग ने तो जलमीनार बना लिया है मगर 46 वार्ड के नगर निगम क्षेत्र में कहीं-कहीं ही सप्लाइ है.

विभागीय व्यवस्था का हाल-अहवाल यह है कि कहीं पानी के लिए हाहाकार मचा है तो कहीं पानी बेकार बह रहा है. एक ही शहर में अलग-अलग मोहल्लों में रहने वाले लोग यह जानकर हैरान हैं कि जिस शुद्ध जल के लिए कहीं परेशानी बनी हुई है वही जल इसी शहर में बर्बाद हो रहा है.
खुश्कीबाग में निगम के टैंकर से वितरित हुआ पानी
पूर्णिया. खुश्कीबाग में करीब एक हफ्ते से पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है. यहां सोमवार को फिर लोग नगर निगम के टैंकर के भरोसे रहे. सोमवार को निगम की ओर से नागरिकों के बीच साढ़े चार हजार लीटर पानी का वितरण किया गया. यहां पानी टंकी खराब हो जाने के कारण नागरिक भारी मुश्किल में पड़े हैं. भीषण गर्मी में लोगों को प्यास बुझाना भी मुश्किल हो गया है.
निगम के टैंकर से एक परिवार के लोग मुश्किल से दो से तीन बाल्टी पानी ले पाते हैं. इसी में भोजन पकाने, पीने, वर्तन धोने और कपड़े साफ करने पड़ते हैं. हालांकि पूर्णिया में पानी की कोई किल्लत नहीं है पर इस इलाके में दशकों पहले से पानी टंकी अवस्थित है और अधिकतम लोग इसी सप्लाइ वाले पानी के भरोसे रह गये. अचानक पानी टंकी खराब होने से पानी का यह संकट आ खड़ा हुआ है.
पूर्व पार्षद राजकुमार यादव की मानें तो परेशानी तब बढ़ गयी जब पीएचइडी वालों ने पानी टंकी को दुरुस्त करने में सुस्ती बरतनी शुरू कर दी. श्री यादव ने बताया कि सोमवार को पानी टंकी की तकनीकी गड़बड़ियां ठीक कर ली गयी हैं पर अभी उससे काफी गंदा पानी निकल रहा है जो इस्तेमाल के लायक नहीं है.
यह उम्मीद की जा रही है कि दो-तीन दिनों के बाद पानी साफ निकलने लगेगा और इसी के साथ परेशानी भी दूर हो जायेगी. इधर, वार्ड पार्षद जानकी देवी ने कहा कि इस क्षेत्र के नागरिकों को पानी की कोई परेशानी नहीं होने दी जायेगी. जरूरत पड़ने पर नगर निगम के टैंकर सुबह से रात तक लोगों को पानी मुहैया करायेंगे.
सड़कों पर ही बेकार बह जाता है पानी
दोपहर दो बजे का समय. पोलिटेक्निक चौक के समीप एनएच से अग्निशमन होते हुए भाष्कर नगर जाने वाली सड़क. यहां सड़क किनारे एक नल लगा हुआ है जो खुला हुआ है और उससे सरकारी पानी बहकर सड़क पर जा रहा है. यहां आस पास कोई नहीं है. नल को बंद करने की कोशिश की गयी पर वह बंद नहीं हुआ. पानी बेकार बहता रहा.
चौक पर आने के बाद पूछने पर कई लोगों ने बताया कि वहां इसी तरह पानी बहते रहता है. कोई देखने वाला नहीं. इधर, जानकारी मिली कि शहर में सार्वजनिक स्थलों पर कई जगह नल लगे हैं जहां किसी न किसी वजह से पानी बेकार बह जाता है. पूर्णिया सिटी से भी कई लोगों ने इसी तरह की शिकायत की है.
यात्री भी भेजें सुविधाओं के फीडबैक पर डीआरएम ने कहा कि स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का अभाव है. रेल प्रशासन के अलावा यात्री भी अपनी राय और फीडबैक डिवीजन स्तर और स्टेशन अधीक्षक को उपलब्ध कराएं ताकि यात्री सुविधाओं का विस्तार किया जा सके और जो भी समस्या है उसे दूर किया जा सके. सुपौल तक बड़ी रेल लाइन का निर्माण कार्य जल्द पूरा होगा.
डीआरएम ने कहा कि सहरसा निरीक्षण के बाद सुपौल का भी निरीक्षण किया जा सकता है. ताकि अमान परिवर्तन का जो कार्य चल रहा है उसे जल्द ही पूरा किया जा सके. डीआरएम ने कहा कि सुपौल तक ट्रेन चलाने के लिए समय सीमा निर्धारित की गयी है. निरीक्षण के बाद जल्द ही उसका पूरा करने का निर्देश दिया जायेगा.
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