Patna News: 1 लाख से अधिक स्ट्रीट लाइटें ILM तकनीक से होंगी लैस; खुद ऑन-ऑफ होंगी, फॉल्ट आने पर बजेगा अलार्म
स्ट्रीट लाइट का फाइल फोटो
राजधानी पटना में स्ट्रीट लाइटों की बार-बार खराब होने की समस्या का समाधान होने जा रहा है. पटना नगर निगम अब 82 हजार स्ट्रीट लाइटों को इंडिविजुअल लाइट मॉनिटरिंग (ILM) तकनीक से जोड़ेगा. साथ ही, 25 हजार नई स्मार्ट लाइटें भी लगाई जाएंगी, जिनमें सोलर पैनल भी होंगे.
Patna News: राजधानी पटना में स्ट्रीट लाइटों के बार-बार खराब होने की समस्या समाप्त होने जा रही है. समय पर मरम्मत न होने की परेशानी से भी अब लोगों को निजात मिलेगी. दरअसल, पटना नगर निगम ने स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को पूरी तरह स्मार्ट व ऑटोमेटेड बनाने का फैसला किया है. पहले नगर निगम द्वारा ग्रुप स्तर पर निगरानी करने वाली सीसीएमएस तकनीक की योजना बनाई जा रही थी. लेकिन, अब बेहतर ट्रैकिंग व ज्यादा फायदों को देखते हुए इंडिविजुअल लाइट मॉनिटरिंग (ILM) तकनीक को लागू किया जा रहा है.
आपके शहर में
इस नई व्यवस्था के तहत शहर में पहले से लगी 82 हजार 888 स्ट्रीट लाइटों को ऑटोमेशन सिस्टम से जोड़ा जाएगा. साथ ही, 25 हजार नई स्मार्ट लाइटें भी लगाई जाएंगी. नई इंस्टॉल होने वाली स्ट्रीट लाइटों में सोलर पैनल भी लगाने की तैयारी है.
मालूम हो कि, साल 2018 से लाइटों के रख-रखाव का जिम्मा संभाल रही एजेंसी इइएसएल का कार्यकाल कल यानी 31 अगस्त को खत्म हो गया है. इसके बाद निगम अब हाइटेक सिस्टम लागू कर रहा है. हालांकि, इसकी अंतिम स्वीकृति सशक्त स्थायी समिति व निगम बोर्ड की आगामी बैठक में दी जाएगी.
ILM तकनीक से मिलेगी हर लाइट की सटीक लोकेशन
पहले प्रस्तावित सीसीएमएस तकनीक में पूरे ग्रुप या पैनल स्तर पर निगरानी होती थी. इससे किसी एक लाइट के खराब होने पर उसका सटीक पता लगाना मुश्किल होता था. लेकिन नई आइएलएम प्रणाली में हर एक स्ट्रीट लाइट पर अलग से इंडिविजुअल कंट्रोलर लगाया जाएगा. इससे यदि शहर के किसी कोने में एक भी लाइट खराब होगी, तो उसकी तुरंत पहचान हो जाएगी.
जीआइएस व सॉफ्टवेयर डैशबोर्ड के जरिए सिस्टम पर ही खराब लाइट की सटीक लोकेशन दिख जाएगी. इसके बाद ऑटोमैटिक मैसेज के जरिए सीधे मेंटेनेंस टीम को सूचना भेज दी जाएगी, जिससे मरम्मत कार्य में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा.
लाइट खराब होने पर खुद फॉल्ट का अलार्म जारी करेगा सिस्टम
आइएलएम तकनीक लागू होने से स्ट्रीट लाइटों की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी. इस सिस्टम से हर लाइट के अपने आप ऑन या ऑफ होने, ऊर्जा की खपत व लाइट की ब्राइटनेस (डिमिंग) को कंट्रोल किया जा सकेगा. पहले जनप्रतिनिधियों या आम नागरिकों की शिकायत के बाद मरम्मत शुरू होती थी, लेकिन अब सिस्टम खुद फॉल्ट का अलार्म जारी करेगा.
यह व्यवस्था प्रिवेंटिव मेंटेनेंस में भी बेहद कारगर साबित होगी. किस लाइट में गड़बड़ी आने वाली है या कहां बिजली खपत ज्यादा हो रही है, इसका डेटा भी आसानी से उपलब्ध रहेगा.
समय पर नहीं हो रहा लाइट की शिकायतों का निपटारा
शहर में आ रही स्ट्रीट लाइटों के खराब होने की समस्या को लेकर नगर निगम ने सर्वे कराया. इसमें मौजूदा मेंटेनेंस व्यवस्था की कई खामियां मिलीं. इसमें मुख्य रूप से शिकायतों का समय पर निपटारा न होना, ऊर्जा खपत का सही आकलन न मिलना और प्रभावी निगरानी का अभाव जैसी बड़ी समस्याएं थीं. कई इलाकों में लाइटें हफ्तों बंद पड़ी रहती थीं.
नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर पर मिलीं करीब 300 से अधिक शिकायतें अभी पेंडिंग हैं. अब नई तकनीक से नगर निगम के पास हर लाइट का डेटा सीधे उपलब्ध रहेगा. साथ ही, बिजली की खपत भी कम होगी.
नयी तकनीक से होंगे ये चार फायदे
- प्रत्येक स्ट्रीट लाइट की ऑन व ऑफ की स्थिति और संचालन संभव होगी.
- किसी भी एक स्ट्रीट लाइट के खराब होने पर उसकी तुरंत पहचान व सटीक लोकेशन मिलेगी.
- अलग-अलग लाइट को नियंत्रित किया जा सकेगा व ब्राइटनेस की सुविधा मिलेगी.
- लोकेशन पता होने से मेंटेनेंस का काम तेज व आसान होगा.
लाइट की रियल टाइम स्थिति दिखेगी निगम के डैशबोर्ड पर
स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी व ऑटोमेटेड बनाने के लिए इंडिविजुअल लाइट मॉनिटरिंग तकनीक लागू की जा रही है. इससे हर लाइट की रियल टाइम स्थिति निगम के डैशबोर्ड पर दिखेगी और नागरिकों की शिकायतों का तुरंत समाधान हो सकेगा. - यशपाल मीणा, नगर आयुक्त, पटना नगर निगम
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