पटना में रिसता रहा रिंग बांध, सोता रहा प्रशासन; बांध टूटा तो 170 घरों में घुसा पानी, जेई को बंधक बनाया
गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
पटना में पुनपुन नदी का रिंग बांध टूटने से 170 से अधिक घर जलमग्न हो गए. प्रशासन की लापरवाही के चलते ग्रामीणों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. आक्रोशित लोगों ने सिंचाई विभाग के जेई को बंधक बना लिया.
Floods in Patna : राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ और संपतचक प्रखंड की सीमा से सटे पुनपुन नदी किनारे स्थित रिंग बांध कई दिनों से कराहता रहा, मरम्मत की आस में तड़पता रहा, लेकिन संबंधित अधिकारी या स्थानीय प्रशासन अनदेखी कर दी. रिंग बांध चिख-चिखकर कह रहा था मुझे मरम्मत की जरूरत है. लेकिन किसी ने इसपर ध्यान नहीं दिया. हालात इतने बिगड़ गये कि पुनपुन के बढ़ते जलस्तर ने उसे ध्वस्त कर दिया,नतीजा यह हुआ कि करीब 170 घर इसके चपेट में आ गये.
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खाने से लेकर मवेशियों के चारा तक का संकट
घरों में रखा अनाज, कपड़े, बर्तन, फर्नीचर, अलमारी, जरूरी दस्तावेज और अन्य घरेलू सामान पानी में डूबकर बर्बाद हो गया. मवेशियों के लिए रखा चारा भी पानी में डूब गया. अचानक पानी बढ़ने से ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई और लोग किसी तरह घरों से निकलकर रिंग बांध और अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो गए.
कई दिनों से हो रहा था रिसाव, फिर भी नहीं हुई मरम्मत
संपतचक प्रखंड के कांडापुर-तारणपुर पंचायत के मुखिया राजू कुमार ने बताया कि कूड़ा नवादा बंगला पर गांव में करीब 170 परिवार रहते हैं. रिंग बांध में कई दिनों से रिसाव हो रहा था और इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को लगातार दी जा रही थी. इसके बावजूद समय रहते बांध की मरम्मत नहीं कराई गई.
ग्रामीणों के अनुसार, जब बांध से पानी का रिसाव तेज हुआ और गांव की ओर पानी बढ़ने लगा, तब जेई को इसकी सूचना दी गई. ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद विभागीय स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई गई. उनका कहना है कि अधिकारियों की ओर से यह कहकर मामले को टाल दिया जाता था कि बांध टूटने के बाद ही मरम्मत होगी. आखिरकार बांध टूट गया और पूरा गांव बाढ़ की चपेट में आ गया.
आक्रोशित ग्रामीणों ने जेई को बनाया बंधक
रिंग बांध टूटने की सूचना पर सिंचाई विभाग के जेई मौके पर पहुंचे तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. आक्रोशित ग्रामीणों ने जेई को बंधक बना लिया और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि समय रहते बांध की मरम्मत करा दी जाती तो उन्हें इस भारी नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता.
जेई को बंधक बनाया, थानाध्यक्ष ने छुड़ाया
जेई को बंधक बनाए जाने की सूचना मिलने पर रात करीब तीन बजे परसा बाजार थानाध्यक्ष मेनका रानी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं. पुलिस ने ग्रामीणों को समझाकर शांत कराया और काफी प्रयास के बाद जेई को ग्रामीणों के कब्जे से मुक्त कराया. इसके बाद टूटे रिंग बांध की मरम्मत का काम शुरू कराने का आश्वासन दिया गया.
तीन घंटे बाद मजदूरों को लगाया गया काम पर
मुखिया राजू कुमार के अनुसार, जेई के मौके पर पहुंचने के बावजूद करीब तीन घंटे बाद मजदूरों को मरम्मत कार्य में लगाया गया. हालांकि बांध की मरम्मत पूरी तरह नहीं हो सकी है. टूटे हिस्से से पानी का दबाव बना हुआ है और गांव की ओर पानी फैल रहा है. इससे ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है.
बांध पर शरण, सामुदायिक किचेन के सहारे लोग
बाढ़ से प्रभावित परिवार रिंग बांध और अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं. अंचल प्रशासन की ओर से सामुदायिक किचेन शुरू कराया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण वहां भी व्यवस्था का दबाव बढ़ गया है. प्रभावित परिवारों ने भोजन, पीने का पानी, दवा, पशुचारा, तिरपाल और अन्य राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है.

खेत-खलिहान भी डूबे, किसानों को दोहरी मार
बाढ़ का पानी गांव के खेत-खलिहानों तक पहुंच गया है. खेतों में लगी फसलें पानी में डूब गई हैं. इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है. घर-गृहस्थी का सामान बर्बाद होने के साथ ही पशुओं के चारे का संकट भी खड़ा हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें घर और खेती, दोनों स्तर पर नुकसान उठाना पड़ रहा है.
धनकी, चिहुट, सलारपुर और बकपुर भी बाढ़ की चपेट में
फुलवारी शरीफ प्रखंड के धनकी, चिहुट, सलारपुर और बकपुर गांवों में भी बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है. चिहुट के पास रिंग बांध में रिसाव रोकने के लिए बोरे रखकर मरम्मत की गई है, लेकिन इसके बावजूद पानी का रिसाव जारी है. इससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों में भय बना हुआ है.
माले की टीम ने लिया जायजा, राहत बढ़ाने की मांग
बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने भाकपा माले के प्रखंड सचिव गुरुदेव दास, ग्रामीण खेत मजदूर सभा के साधु शरण, भाकपा माले के नलिन पासवान समेत अन्य कार्यकर्ताओं की टीम प्रभावित गांवों में पहुंची. टीम ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली.
माले नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रभावित आबादी के लिए राहत कार्य पर्याप्त नहीं है. कई लोगों को अब तक जरूरी सहायता नहीं मिल सकी है. बाढ़ के कारण आवागमन भी प्रभावित है और लोग नाव के सहारे आने-जाने को मजबूर हैं. नेताओं ने प्रभावित गांवों में पर्याप्त राहत सामग्री, नावों की संख्या बढ़ाने, सुरक्षित स्थानों पर रहने और भोजन की व्यवस्था करने के साथ चिहुट के पास रिंग बांध से हो रहे रिसाव को स्थायी रूप से बंद कराने की मांग की.
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