मसौढ़ी PHC में प्रसव के बाद नवजात की मौत पर भारी बवाल: परिजनों ने की तोड़फोड़ और गार्ड से मारपीट, डॉक्टर बोले- दी गई थी ऑपरेशन की सलाह
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मसौढ़ी, पटना.
मसौढ़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के बाद नवजात शिशु की मौत से परिजनों में भारी आक्रोश है. अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्होंने तोड़फोड़ की. जानिए इस घटना के पीछे की पूरी कहानी.
Patna News: पटना जिले के मसौढ़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में शनिवार को प्रसव के उपरांत एक नवजात शिशु की मौत के बाद जमकर बवाल हुआ. आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्यकर्मियों पर इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिसर में जोरदार हंगामा किया. उपद्रव के दौरान अस्पताल की खिड़की के शीशे टूट गए और सुरक्षा गार्ड के साथ मारपीट की बात भी सामने आई है. हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने परिजनों द्वारा लगाए गए लापरवाही के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है.
2 दिन से पेट में नहीं थी हलचल, परिजनों का लापरवाही का आरोप
नवजात के पिता गौतम कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी गुड़िया कुमारी नौ माह की गर्भवती थीं. परिजनों का दावा है कि पिछले दो दिनों से गर्भ में पल रहे बच्चे की हलचल महसूस नहीं हो रही थी. शनिवार तड़के प्रसव पीड़ा होने पर उसे पीएचसी लाया गया, जहां सुबह करीब 7:32 बजे सामान्य प्रसव से बच्चे का जन्म हुआ. परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान डॉक्टरों और कर्मियों ने समुचित देखरेख नहीं की. जन्म के बाद नवजात की स्थिति अत्यंत नाजुक थी और थोड़ी ही देर में उसने दम तोड़ दिया. परिजनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.
अनुमंडल अस्पताल से PHC पहुंचे थे परिजन, सिजेरियन की दी गई थी सलाह
दूसरी ओर, पीएचसी प्रबंधन ने पूरे मामले में परिजनों की मनमानी को जिम्मेदार ठहराया है. अधिकारियों के अनुसार, गर्भवती को पहले मसौढ़ी अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया था, जहां जटिलता देखते हुए डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन कराने को कहा था. लेकिन परिजन बात छिपाकर उसे पीएचसी ले आए. पीएचसी में भी चिकित्सकों ने ऑपरेशन की जरूरत बताई और स्पष्ट किया कि वहां सर्जरी की व्यवस्था नहीं है, इसलिए तत्काल अनुमंडल अस्पताल या पीएमसीएच ले जाएं, पर परिजन नहीं माने और इसी दौरान प्रसव हो गया.
'गर्भ में ही बच्चे ने निगल लिया था मेकोनियम': पीएचसी प्रभारी डॉ. रामानुजम सिंह
लापरवाही के आरोपों का खंडन करते हुए पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रामानुजम सिंह ने कहा, "महिला को पहले अनुमंडल अस्पताल में सिजेरियन की सलाह दी गई थी, लेकिन परिजन उसे छिपाकर पीएचसी ले आए. प्रसव के बाद जच्चा सुरक्षित थी, पर नवजात की स्थिति बेहद गंभीर थी क्योंकि उसने गर्भ में ही मेकोनियम (शिशु का पहला मल) निगल लिया था. हमने तत्काल पीएमसीएच रेफर कर एंबुलेंस भी उपलब्ध करा दी थी, लेकिन परिजन उसे मसौढ़ी के एक निजी क्लीनिक ले गए, जहां बच्चे की मौत हो गई. इसके बाद वे वापस अस्पताल आकर तोड़फोड़ और हंगामा करने लगे."
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