IGIMS में हेपेटाइटिस दिवस पर सेमिनार, विशेषज्ञों ने कहा- मोटापा शुगर से लेकर कैंसर तक का बन रहा कारण

Author Anand tiwary|Edited by Nikhil Anurag
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IGIMS में हेपेटाइटिस दिवस पर सेमिनार का हुआ आयोजन

IGIMS में हेपेटाइटिस दिवस पर सेमिनार का हुआ आयोजन

विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर आईजीआईएमएस में आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने मोटापे से होने वाली गंभीर बीमारियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि कैसे बदलती जीवनशैली और मोटापा लिवर से जुड़ी बीमारियों, जैसे सिरोसिस और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है.

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Hepatitis Day seminar at IGIMS: विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) के गैस्ट्रो विभाग की ओर से मंगलवार को लिवर और हेपेटाइटिस से जुड़ी बीमारियों पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बदलती जीवनशैली, मोटापा और उससे होने वाली गंभीर बीमारियों को लेकर लोगों को जागरूक किया.

मोटापा कई गंभीर बीमारियों की वजह

दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल से पहुंचे प्रो. डॉ. आशीष कुमार ने कहा कि मोटापा नियंत्रित कर लोग कई बीमारियों से बच सकते हैं. उन्होंने बताया कि मोटापा शुगर, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का बड़ा कारण बन रहा है. उन्होंने कहा कि शरीर में फैट और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से कोरोनरी धमनी में समस्या उत्पन्न हो सकती है. इसके साथ ही लिवर पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है और आगे चलकर लिवर सिरोसिस जैसी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.

आईजीआईएमएस में शुरू हुई बेरियाट्रिक सर्जरी

आईजीआईएमएस के मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. डॉ. मनीष मंडल ने कहा कि मोटापा तेजी से बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्या बन चुका है. इसे देखते हुए संस्थान में बेरियाट्रिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है. उन्होंने बताया कि अब तक कई मोटापे से ग्रसित मरीजों की सर्जरी कर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य की ओर लौटने में मदद मिली है.

हेपेटाइटिस बी और सी पर नियंत्रण संभव

गैस्ट्रो विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संजीव कुमार झा ने कहा कि हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है. वहीं, आधुनिक दवाओं के कारण हेपेटाइटिस सी के मामलों में भी कमी आई है. उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण हेपेटाइटिस बी और सी के बाद लिवर सिरोसिस की समस्या बढ़ रही है. यदि किसी मरीज में लिवर सिरोसिस की पहचान हो जाती है, तो उसे हर छह माह में अल्ट्रासाउंड जांच जरूर करानी चाहिए. इससे लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सकता है.

विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

सेमिनार का उद्घाटन आईजीआईएमएस के निदेशक प्रो. डॉ. बिंदे कुमार, मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. डॉ. मनीष मंडल और गैस्ट्रो विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संजीव कुमार झा ने संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम में गैस्ट्रो विभाग के डॉ. रविकांत कुमार, कैंसर रोग विभाग के प्रो. डॉ. दिनेश कुमार समेत बड़ी संख्या में चिकित्सक और विशेषज्ञ मौजूद रहे.


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