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एक नेकी का सौ गुना मिलता है सवाब
एक रात की इबादत हजार रातों की इबादत के बराबर है फुलवारीशरीफ : रविवार को रमजान के तीसरे रोजे पूरे हो गये. अल्लाह की बारगाह में अमीर-गरीब का भेदभाव पीछे छूट गया और शुरू हो गाया इबादत का दौर. बड़े-बूढ़ों के साथ महिलाएं और बच्चे भी रोजा रख कर अपनी पाकीजगी से खुदा को ज्यादा […]
एक रात की इबादत हजार रातों की इबादत के बराबर है
फुलवारीशरीफ : रविवार को रमजान के तीसरे रोजे पूरे हो गये. अल्लाह की बारगाह में अमीर-गरीब का भेदभाव पीछे छूट गया और शुरू हो गाया इबादत का दौर. बड़े-बूढ़ों के साथ महिलाएं और बच्चे भी रोजा रख कर अपनी पाकीजगी से खुदा को ज्यादा -से -ज्यादा खुश करने में लगे हैं.
इस पाक महीने में अल्लाह अपने नेक बंदों को इनाम पाने का भरपूर मौका देते हैं. हर कोई अपने ईमान और नेक नियति की मिसाल पेश कर अल्लाह से इनाम पाने में लगा हुआ है. रोजेदारों के लिए बाजार पूरी तरह सज गये हैं. सेवइयां, बाकरखानी, किसिम-किसिम की दुकानों पर खरीदारों की भी उमड़ रही है. दिन से लेकर देर रात तक खरीदारी का दौर चलता रहता है. देर रात तक इलाकों में चहल-पहल बनी रहती है .
हर मुसलमान पर फर्ज है रोजा : इस माह में हर मुसलमान के लिए रोजा फर्ज है. रोजा रखने से बरकत होती है. रमजान में की गयी एक नेकी का सौ गुना सवाब मिलता है. लिहाजा रमजान के पाक महीने में ज्यादा-से-ज्यादा इबादत करनी चाहिए और गरीबों और मजलूमों की मदद करनी चाहिए. इसलाम के चार अहम रु क्नों में तीसरा रु क्ना रोजा है.
सन दो हिजरी में रोजा मुसलमानों पर फर्ज करार दिया गया है . खुदा की बारगाह में रोजा बंदों की प्यारी इबादत है. इस माह में की गयी इबादतों का इनाम खुदा अपने फरिश्तों के हाथों अता फरमाता है. रमजान महीने में एक रात में की गयी इबादत हजार महीनों में की गयी इबादत के बराबर होता है. रमजान में अल्लाह अपने बंदों के लिए जन्नत के दरवाजे भी खोल देता है और जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिये जाते हैं. शैतानों को जंजीरों में जकड़ दिया जाता है .
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