यहां हाथी से अधिक गैंडा घास, तो शेर से ज्यादा मांस खाता है बाघ
पटना : पटना जू के जानवरों में सबसे बड़ा भोजनभट्ट गैंडा है. वह हाथी से अधिक घास खाता है. हाथी एक दिन में औसतन 12 किलो जबकि गैंडा 14 किलो घास खाता है. मांसाहारी जानवरों में शेर भले ही सबसे बड़ा शिकारी हो लेकिन खाने के मामले में बाघ उस पर भारी है. वह हर […]
पटना : पटना जू के जानवरों में सबसे बड़ा भोजनभट्ट गैंडा है. व��� हाथी से अधिक घास खाता है. हाथी एक दिन में औसतन 12 किलो जबकि गैंडा 14 किलो घास खाता है. मांसाहारी जानवरों में शेर भले ही सबसे बड़ा शिकारी हो लेकिन खाने के मामले में बाघ उस पर भारी है. वह हर दिन औसतन 11 किलो मांस खाता है जबकि शेर साढ़े आठ किलो जिसमें छह किलो बीफ और दो किलो मुर्गा होता है. लकड़बग्घा हर दिन तीन किलो मांस खाता है, जिसमें दो किलो मुर्गा और एक किलो बीफ शामिल है. भेड़िया भी हर दिन तीन किलो मांस खाता है. उसमें ढाई किलो मुर्गा और आधा किलो बीफ होता है. हिप्पो का खुराक भी बहुत अधिक है. वह हाथी और गैंडा से थोड़ा कम खाता है. बरसीम घास उसका प्रिय खुराक है और हर दिन वह औसतन 10 किलो घास खा जाता है.
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सोमवार को रखा जाता है अल्पाहार व उपवास पर
जू के जानवरों को सोमवार को उपवास कराया जाता है. बड़े मांसाहारी जानवरों को इस दिन पूरे उपवास पर रखा जाता है जबकि छोटे जानवरों को अंडा या हल्का भोजन दिया जाता है. शाकाहारी जानवरोंं को इस दिन अल्पाहार पर रखा जाता है.
औसत खुराक शाकाहारी जानवर
हाथी- 12 किलो घास
गैंडा- 14 किलो घास
हिप्पो- 10 किलो घास
औसत खुराक मांसाहारी जानवर
शेर – 8.5 किलो मांस
बाघ – 11 किलो बीफ
लकड़बग्घा- 3 किलो मांस
भेड़िया- 3 किलो मांस
बाघ के लिए लगा ब्लोअर चिंपांजी खा रहा च्यवनप्राश
बढ़े ठंड को देखते हुए जू प्रशासन ने जानवरों को उससे बचाने के लिए विशेष प्रबंध किये हैं. हिरण, चीतल, सांभर और नीलगाय के केज के चारों ओर पुआल की टट्टी लगा दी गयी है और नीचे जमीन पर पुआल बिछा दिया गया है. शेर, बाघ जैसे बड़े जानवरों के नाइट हाउस में ब्लोअर लगा दिये गये हैं जबकि छोटे जानवरोंं के केज में हीटर. साथ ही, इनके नाइट हाउस में लकड़ी के तख्ते लगाये गये हैं ताकि इनको जमीन की ठंड नहीं लगे. सांप के शो केस में बल्ब लगाये गये हैं, हालांकि अधिक ठंंड के कारण इनमें से ज्यादातर हाइबरनेशन में चले गये हैं. मांसाहारी पशुओं को दिये जाने वाले बीफ (भैंसा का मांस) और चिकेन की मात्रा भी बढ़ा दी गयी है. चिंपांजी को च्यवनप्राश दिया जा रहा है. उसे ओढ़ने के लिए कंबल भी दिये गये हैं. साथ ही, पक्षियों को मिनरल फूड सप्लीमेंट दिया जा रहा हैं ताकि उनके शरीर में ठंड़ से निबटने लायक गर्मी मौजूद रहे. कई पक्षियों के केज का कुछ हिस्सा पुआल की टट्टी से ढक दिया गया है ताकि उनको रात में गिरने वाले ओस और ठंड में ठिठुुरने से बचाया जा सके.
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