पटना : चालू वित्तीय वर्ष के पांच माह में 15 फीसदी राशि हुई खर्च

Published at :07 Sep 2019 8:03 AM (IST)
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पटना : चालू वित्तीय वर्ष के पांच माह में 15 फीसदी राशि हुई खर्च

योजना या पूंजीगत व्यय में एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान पटना : चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान दो-तीन विभागों को छोड़कर अन्य सभी विभाग अपनी योजना मद या पूंजीगत व्यय की राशि खर्च करने में बेहद सुस्त हैं. इस वित्तीय वर्ष के दो लाख पांच हजार करोड़ के बजट में करीब एक लाख […]

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योजना या पूंजीगत व्यय में एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान
पटना : चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान दो-तीन विभागों को छोड़कर अन्य सभी विभाग अपनी योजना मद या पूंजीगत व्यय की राशि खर्च करने में बेहद सुस्त हैं. इस वित्तीय वर्ष के दो लाख पांच हजार करोड़ के बजट में करीब एक लाख करोड़ योजना मद में खर्च के लिए रखा गया है. पांच महीने बीतने के बाद भी अब तक इसमें महज 15 फीसदी रुपये ही खर्च हुए हैं.
जबकि, बीते वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान शुरुआती पांच महीने में 25 फीसदी राशि खर्च हो चुकी थी. इस बार राशि कम खर्च होने की दो मुख्य वजहों में केंद्र की तरफ से आने वाली केंद्रीय प्रायोजित योजना (सीएसएस) में निर्धारित लक्ष्य से कम राशि आना और वित्तीय प्रबंधन के लिए लागू की गयी सीएफएमएस प्रणाली का सही तरीके से काम नहीं करना है.
चालू वित्तीय वर्ष के लिए सीएसएस के अंतर्गत चलने वाली सभी योजनाओं में 37 हजार 407 रुपये निर्धारित की गयी है. इसमें अब तक महज पांच हजार करोड़ रुपये ही आये हैं. इसकी मुख्य वजह मौजूदा तिमाही के दौरान केंद्र में जीएसटी समेत अन्य टैक्स संग्रह में 40 हजार करोड़ रुपये की गिरावट आने को भी समझा जा रहा है.
केंद्रीय योजनाओं में पैसे कम आने के अलावा सीएफएमएस प्रणाली के अब तक सुचारु तरीके से काम नहीं करने की वजह से पैसे ट्रांसफर होने और इसका लेखा-जोखा रखने में समस्या आ रही है. हालांकि विभागीय अधिकारी इसका प्रमुख कारण लोकसभा चुनाव के कारण अप्रैल-मई महीने में खर्च का नहीं होना बताते हैं. अक्तूबर महीने से योजना मद में खर्च में तेजी आने की संभावना है.
अब तक जिन विभागों में शून्य या काफी कम खर्च हुआ है, उसमें कृषि, पशुपालन, कला-संस्कृति, उद्योग, पंचायती राज, ग्रामीण कार्य, पिछड़ा-अतिपिछड़ा कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, स्वास्थ्य समेत अन्य विभाग शामिल हैं. जबकि पथ निर्माण, शिक्षा, उत्पाद एवं मद्य निषेध जैसे कुछ अन्य विभागों में खर्च ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है. फिर भी इनके खर्च का प्रतिशत 20 फीसदी से कम ही है.
2018-19 में 25% राशि हो चुकी थी खर्च
इन विभागों में योजनाआकार का इतनाआवंटन, खर्च शून्य या एक प्रतिशत से कम
– समाज कल्याण 6,997
– स्वास्थ्य 5,149
– पंचायती राज 3,114
– कृषि 2344
– पशुपालन 666
– कला संस्कृति 513
– पिछड़ा अतिपिछड़ा 1679
– भवन निर्माण 600
– स्वास्थ्य 5,238
– उद्योग 713
– अल्पसंख्यक कल्याण 500
– ग्रामीण कार्य 9,996
– पंचायती राज 3,179
इन विभागों ने खर्च किये इतने % रुपये
– शिक्षा 20,609 [19.57%]
– वन पर्यावरण 357 [2.52%]
– श्रम संसाधन 988 [2.40%]
– योजना एवं विकास 1855 [0.03%]
– ग्रामीण विकास 15,834 [4.42%]
– एससी-एसटी कल्याण 1636 [0.43%]
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