बिहार में चौंकाने वाला होगा भाजपा अध्यक्ष का नाम, नये चेहरे पर लगेगा दांव

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पटना : भाजपा की प्रदेश इकाई में इन दिनों पंचायत, प्रखंड से लेकर जिला स्तर पर नये नेतृत्वकर्ता को लेकर तेज गहमागहमी है. करीब एक महीने तक चले सदस्यता अभियान के हाल में समाप्त होने के बाद अब संगठन चुनाव होने वाले हैं, जिसमें पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक नये नेतृत्वकर्ता या अध्यक्ष का चयन होना है.
इनके सभी स्तर के चुनाव 15 दिसंबर तक समाप्त हो जायेंगे. इसके बाद दिसंबर में ही राज्य को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने की संभावना है. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए नये अध्यक्ष की तलाश हो रही है. पिछड़ा और अतिपिछड़ी जमात के नेताओं के इतर अगड़े समाज के नेता भी अध्यक्ष पद की कतार में हैं. यह माना जा रहा कि अध्यक्ष के सहारे राज्य के सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश होगी.
कई नामों के कयास लग रहे हैं, लेकिन अब तक अध्यक्ष के फ्रेम में बैठने वाले सबसे उपयुक्त व्यक्ति नहीं मिला है. प्रदेश अध्यक्ष के लिए एक सबसे अहम मसले को लेकर जिच चल रही है कि यह मौका फिर से पिछड़ी जाति से आने वाले किसी नेता के सिर बंधेगा या नये समीकरण की तलाश में पार्टी की कमान अगड़ी जमात के किसी नेता को सौंपी जायेगी. इस पद के लिए शुरुआत में जिन कुछ दिग्गजों के नाम चले थे, उन पर विराम लगा गया है. कुछ नये नामों पर कयास लगने शुरू हो गये हैं.
तमाम पेंचिदगियों के बीच यह तय हो गया है कि नये अध्यक्ष का नाम चौंकाने वाला होगा. यह तय है कि नये साल में प्रदेश में भाजपा का नेतृत्व करने वाला कोई नया चेहरा ही होगा, जिसे चुनाव और वोट बैंक को ध्यान में रखकर चुना जायेगा.
बिहार में है दोहरा प्रभार
सिर्फ बिहार में ही प्रदेश अध्यक्ष के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी यह पद दोहरे प्रभार में चल रहा है. जबकि यूपी, कर्नाटक में प्रदेश अध्यक्ष को दूसरा बड़ा दायित्व मिलने के बाद तुरंत नये नेतृत्व करने वाले का चयन हो चुका है. माना जा रहा है कि यहां मौजूद कुछ पेचिदगियों के कारण नाम फाइनल नहीं हो पा रहा है.
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