पटना : शोध से पहले छह माह का कोर्स जरूरी
Updated at : 08 May 2019 8:46 AM (IST)
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पटना : पटना विश्वविद्यालय में पीएचडी से पूर्व होने वाले कोर्स वर्क के लिए नया सिलेबस बनाया गया है. इसी के तहत रिसर्च मेथोडोलॉजी की पढ़ाई होगी. इसमें 2016 रेगुलेशन से पीएचडी मानकों का ध्यान रखा गया है और सिलेबस को तैयार किया गया है. अब छात्रों को कोर्स वर्क के तहत तीन-तीन महीने के […]
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पटना : पटना विश्वविद्यालय में पीएचडी से पूर्व होने वाले कोर्स वर्क के लिए नया सिलेबस बनाया गया है. इसी के तहत रिसर्च मेथोडोलॉजी की पढ़ाई होगी. इसमें 2016 रेगुलेशन से पीएचडी मानकों का ध्यान रखा गया है और सिलेबस को तैयार किया गया है.
अब छात्रों को कोर्स वर्क के तहत तीन-तीन महीने के दो भाग में क्लास करने होंगे. एक संबंधित संकाय में होगा. उक्त संकाय के सभी विषयों के छात्रों के लिए वह कॉमन होगा. दूसरा कोर्स कंटेमपररी क्रिटिकल प्रेसपेक्टिव्स एंड टेक्चुअल रीडिंग, प्रेजेंटेशन्स का होगा. यह चार क्रेडिट का होगा. तीन महीने का कोर्स विभाग में होगा. कुल छह महीने का कोर्स वर्क दो भाग में होगा, उसके बाद ही पीएचडी में रजिस्ट्रेशन होगा.
नये कोर्स वर्क से छात्रों को क्या होगा फायदा
नये कोर्स वर्क के सिलेबस का सबसे बड़ा फायदा होगा कि छात्रों को सिनॉप्सिस बनाने में मदद मिलेगी. पहले छात्रों को खुद से बिना किसी जानकारी के सिनाॅप्सिस तैयार करना पड़ता था. अब बाकायदा शिक्षक रिसर्च स्कॉलरों को बतायेंगे कि उन्हें किस प्रकार से सिनॉप्सिस तैयार करना है.
रिसर्च स्कॉलरों को पूरा रिसर्च वर्क पहले पढ़ाया जायेगा. इससे फायदा यह होगा छात्र जब रिसर्च करना शुरू करेंगे, तो उन्हें रिसर्च के तरीके पता होंगे, जिसके आधार पर वे अपने रिसर्च की रूपरेखा तय करेंगे.
यूजीसी के नये मानकों पर रिसर्च का सिलेबस होने से छात्रों को आगे उनके कॅरियर तथा बाद में होने वाले साक्षात्कार में फायदा होगा.
छात्रों को अपने टाइटल आदि का चयन करने में आसानी होगी
दूसरे पेपर में पेपर प्रेजेंटेशन आदि के संबंध में भी जानकारी दी जायेगी, जिसमें छात्र साक्षात्कार के दौरान किस तरह अपना प्रेजेंटेशन करेंगे, यह सब बताया जायेगा. छात्रों को कहीं भी रिसर्च को प्रेजेंट करने तथा सवालों को फेस करने का प्रशिक्षण प्राप्त हो पायेगा.
प्लेगरिज्म टेस्ट से नकल का नहीं रहेगा ऑप्शन
यूजीसी द्वारा 20 प्रतिशत तक कंटेंट में छूट दी गयी है. इससे अधिक कंटेंट मिलने पर छात्र दिक्कत में फंस सकते हैं. कॉपी-पेस्ट करने वाले छात्रों की अब एक नहीं चलेगी.
क्योंकि विवि द्वारा प्लेगरिज्म (नकल) की जांच का एक सॉफ्टवेयर खरीदा गया है, जो छात्रों द्वारा जमा की गयी थीसिस की पूर्व में ही जांच कर लेगा कि इसमें कितना कॉपी-पेस्ट है या कंटेंट कहां से लिया गया है. 20 प्रतिशत से अधिक कंटेंट होने पर पीयू उक्त थीसिस को जमा ही नहीं लेगी. क्योंकि अब थीसिस को ऑनलाइन अपलोड भी किया जायेगा. इससे कोई भी सिनॉप्सिस को देख-पढ़ सकेगा.
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