बेटों से अधिक बेटियां ले रहीं एडिमशन, बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में लड़कियों का नामांकन 84.3%
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Jan 2019 7:19 AM
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पटना : बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में बेटों से अधिक बेटियां नामांकन करा रही हैं. 11 से 14 साल के उम्र वर्ग में लड़कों का नामांकन जहां 76.3% है तो लड़कियों का 84.3% है. हालांकि, लड़कों का प्रतिशत पाठ पढ़ने के साथ ही गणित की प्रतिभा भी लड़कियों की तुलना में ज्यादा […]
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पटना : बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में बेटों से अधिक बेटियां नामांकन करा रही हैं. 11 से 14 साल के उम्र वर्ग में लड़कों का नामांकन जहां 76.3% है तो लड़कियों का 84.3% है.
हालांकि, लड़कों का प्रतिशत पाठ पढ़ने के साथ ही गणित की प्रतिभा भी लड़कियों की तुलना में ज्यादा है. पिछले आठ सालों में जहां निजी स्कूलों में एडमिशन का प्रतिशत बढ़ा है और सरकारी स्कूलों में नामांकन करा लेने वाले बच्चों की स्कूलों में उपस्थिति में कमी आयी है.
ये आंकड़े असर यानी एनुअल स्टैटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट में सामने आये हैं. बिहार में असर का सर्वेक्षण 38 जिलों में किया गया, जिसमें 1140 गांवों के 22 हजार 817 घरों में तीन से 16 वर्ष के 50 हजार 338 बच्चों से कई स्तरों पर सवाल जवाब किये गये.
स्कूलों के संसाधनों की भी जांच कर रिपोर्ट बनायी गयी है. मंगलवार को प्रथम की ओर से संजय कुमार और प्रभाकर कुमार ने असर 2018 रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि 35 जिलों में डाइट के प्रशिक्षणार्थियों ने और जहानाबाद, अरवल व जमुई में एनजीओ की मदद से सर्वेक्षण किया गया है.
मैथ में लड़कों का स्तर लड़कियों से बेहतर
प्रारंभिक गणित में बिहार के लड़के, लड़कियों पर भारी हैं. राष्ट्रीय स्तर पर 14-16 साल के बच्चों में जहां 50% लड़के डिवीजन यानी भाग के सवालों को सही-सही हल कर लेते हैं. वहीं लड़कियों में यह प्रतिशत केवल 44 है.
उम्र सीमा को दरकिनार कर दें तो 65.9% लड़के डिवीजन (भाग) के सवालों को हल कर सकते हैं, जबकि लड़कियों का प्रतिशत इस मामले में 54.3 है. 14 से 16 उम्र वर्ग में भाग के सवालों को हल कर लेने वालों में आधे से थोड़ा कम बच्चे ही समय यानी टाइम मैनेजमेंट संबंधी सवालों को हल कर पाते हैं. 45% बच्चे समय की गणना कर सकते हैं.
नामांकन में अागे, लेकिन उपस्थिति में पीछे
नामांकन के पीछे सरकारी योजनाओं में दिलचस्पी भी नजर आ रही है. असर की रिपोर्ट बता रही है कि छह से 14 साल उम्र सीमा में नामांकन 96% है, लेकिन उपस्थिति 56.5% ही है. ऑल इंडिया के लेवल पर नामांकन का आंकड़ा 71% है.
हालांकि, बीच में स्कूल छोड़ने की दर में कमी आयी है यानी ड्रॉपआउट घटा है. 15-16 साल की उम्र सीमा में लड़कों से ज्यादा लड़कियां नामांकन लेती हैं. 9.8% लड़कियां स्कूल से बाहर हैं, वहीं 11.8% लड़के स्कूल नहीं जाते हैं.
कई सुविधाओं में राष्ट्रीय औसत से बिहार आगे
रिपोर्ट कह रही है कि बिहार के स्कूल आधारभूत सुविधाओं में राष्ट्रीय औसत के सापेक्ष या आगे चल रहे हैं. कई पैमाने पर यहां के स्कूल देश के अन्य राज्यों से आगे हैं. मसलन स्कूलों में पेयजल की सुविधा राष्ट्रीय औसत 75% की तुलना में 90% है. वहीं शौचालय से लैस स्कूलों में भी बिहार का औसत ज्यादा है. मिड डे मील योजना में भी राष्ट्रीय औसत 87% की तुलना में यहां का प्रतिशत 85 के साथ आसपास बना हुआ है
सुधार की गुंजाइश
सीखने के स्तर में ओवरऑल गिरावट बड़ी चिंता का कारण.
एक दशक पहले बिहार का सीखने का स्तर राष्ट्रीय औसत से ऊपर था पर अब ऐसा नहीं है.
बच्चों को पढ़ने में कौशल संपन्न बनाने पर ध्यान देने की आवश्यकता.
पांचवीं के आधे बच्चे दूसरी क्लास का घटाव भी नहीं जानते.
पांचवीं और आठवीं के बच्चों के शुद्ध पढ़ने का औसत सबसे ज्यादा गिरा है.
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