पटना : फेफड़ा कैंसर अधिक घातक, पर इलाज संभव
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Aug 2018 5:41 AM (IST)
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इस्ट ऑन्कोलॉजी ग्रुप बिहार के छठे वार्षिक सम्मेलन में आयोजित सेमिनार में डॉक्टरों ने रखे अपने-अपने विचार पटना : कैंसर उपचार के क्षेत्र में काफी शोध हुआ है और इस शोध का लाभ कैंसर मरीजों को मिल भी रहा है. कैंसर के कई प्रकार है, जो अलग-अलग कारणों से होता है. लेकिन, फेफड़ा के कैंसर […]
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इस्ट ऑन्कोलॉजी ग्रुप बिहार के छठे वार्षिक सम्मेलन में आयोजित सेमिनार में डॉक्टरों ने रखे अपने-अपने विचार
पटना : कैंसर उपचार के क्षेत्र में काफी शोध हुआ है और इस शोध का लाभ कैंसर मरीजों को मिल भी रहा है. कैंसर के कई प्रकार है, जो अलग-अलग कारणों से होता है.
लेकिन, फेफड़ा के कैंसर धूम्रपान से होता है, जो अधिक घातक है. हालांकि, फेफड़ा कैंसर के इलाज भी संभव है. दिल्ली से आये कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ कुंदन सिंह चुफल शनिवार को इस्ट ऑन्कोलॉजी ग्रुप बिहार के छठे वार्षिक सम्मेलन में आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे.
सम्मेलन का उद्घाटन आईजीआईएमएस के निदेशक डॉ एनआर विश्वास किया. उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ विश्वास ने कहा कि जागरूकता से ही कैंसर को खत्म किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि सूबे में भी कैंसर मरीजों का बेहतर इलाज संभव है. इसको लेकर आईजीआईएमएस सहित कई अस्पतालों में नये-नये उपकरणों की व्यवस्था सुनिश्चित की गयी है, जिससे कैंसर मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ रहा है.
टाटा कैंसर हॉस्पिटल से आये डॉ राजीव शरण ने कहा कि बड़ी संख्या में युवा पीढ़ी द्वारा खैनी-तंबाकू का सेवन किया जाने लगा है, जिससे मुंह व गले के कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ गयी है. कैंसर मरीजों में 40 प्रतिशत मरीज खैनी-तंबाकू का सेवन करने वाले होते हैं.
महिलाओं में ब्रेस्ट व सर्वाइकल कैंसर अधिक होता है. कैंसर के प्रथम व द्वितीय चरण में इलाज शुरू हो जाता है, तो बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है. इसके साथ ही इलाज में ज्यादा खर्च नहीं होता है. वहीं, तीसरे व चौथे चरण में इलाज महंगा व बचने की संभावना कम हो जाती है. नेपाल के भरतपुर हॉस्पिटल से आये डॉ सुशील कुमार सिंह ने कहा कि निम्न स्तर के खान-पान से भी कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है.
बासी खाना और देर से बने खाने में हानिकारक बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं और इस खाने को खाने से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है. आईजीआईएमएस के डॉ मनीष मंडल, कैंसर विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राजेश कुमार सिंह, पीएमसीएच के कैंसर विभागाध्यक्ष डॉ पीएन पंडित सहित दर्जनों डॉक्टर उपस्थित थे.
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