पटना : देश-विदेश की विभिन्न कलाओं को सीखेंगे छात्र

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Jul 2018 9:26 AM

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पटना : कला व शिल्प महाविद्यालय में नये सत्र की शुरुआत हो चुकी है. इस बार नये सत्र में स्टूडेंट्स को काफी कुछ सीखने और समझने को मिलेगा. इसकी तैयारी कॉलेज प्रशासन ने शुरू कर दी है. कॉलेज इसी सत्र से चेंज-एक्सचेंज प्रोग्राम की शुरुआत करेगा. इसके लिए देश के विभिन्न कला संस्थानों से संपर्क […]

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पटना : कला व शिल्प महाविद्यालय में नये सत्र की शुरुआत हो चुकी है. इस बार नये सत्र में स्टूडेंट्स को काफी कुछ सीखने और समझने को मिलेगा. इसकी तैयारी कॉलेज प्रशासन ने शुरू कर दी है. कॉलेज इसी सत्र से चेंज-एक्सचेंज प्रोग्राम की शुरुआत करेगा.
इसके लिए देश के विभिन्न कला संस्थानों से संपर्क किया जा रहा है. कॉलेज शुरुआती दौर में बीएचयू, शांति निकेतन, खैरागढ़, बड़ोदरा, जामिया मिलिया इस्लामिया आदि संस्थानों से संपर्क करेगा. यहां से चेंज-एक्सचेंज प्रोग्राम की शुरुआत होगी. कला में आधुनिक तरीके के बारीकियों से दोनों संस्थान के स्टूडेंट्स सीख लेंगे. देश के अलग-अलग संस्थानों से आये हुए बच्चे पटना आ कर बिहार की कला से मुखातिब होंगे. वहीं यहां के बच्चे दूसरे राज्य जाकर वहां की कला सीखेंगे.
देश-विदेश के कलाकार देंगे टिप्स : कॉलेज के प्राचार्य डॉ अजय कुमार पांडेय ने कहा कि कला संस्थानों में चेंज-एक्सचेंज प्रोग्राम चलाना काफी जरूरी है. यहां के बच्चों को काफी कुछ सीखने को मिलेगा. नये-नये स्थान जाने पर कला के अनेक पहलुओं को समझ पायेंगे. उन्होंने कहा कि पटना में कोई भी स्थापित कलाकार आते हैं तो उन्हें दो घंटों के लिए कॉलेज बुलाया जाता है. बिहार म्यूजियम की स्थापना होने से यहां कलाकारों की गतिविधियां बढ़ी हैं. यहां आने वाले देश-विदेश की कलाकारों की लंबी लिस्ट है.
आगे भी स्टूडेंट्स को सीनियर कलाकारों का मार्गदर्शन मिलता रहेगा. डॉ पांडेय ने कहा कि सत्र 2018-19 में चेंज-एक्सचेंज प्रोग्राम के सफल संचालन के बाद धीरे-धीरे विदेशी कला को भी स्टूडेंट्स सीखेंगे. विदेशों में पेंटिंग के नये-नये तरीके और मूर्ति कला के आधुनिक तरीके को भी सत्र 2019-20 से स्टूडेंट्स सीखेंगे. प्रो पांडेय ने कहा कि यहां के आर्ट कॉलेज के काफी छात्र इंग्लैंड, अमेरिका, अस्ट्रेलिया के साथ अन्य देशों में काम कर रहें है. यहां के एलुमनाई छात्र विदेश के विभिन्न कला संस्थानों से संपर्क कर यहां के स्टूडेंट्स को विदेशी कला के टिप्स देंगे.
लोकल कला को भी सिलेबस में जोड़ना चाहिए. अभी कॉलेज में मूर्ति कला, चित्रकला, छापाकला (ग्राफिक्स) व्यावसायिक काल, कला इतिहास एवं दर्शन तथा सौंदर्य शास्त्र और फोटोग्राफी की पढ़ाई होती है. कला संस्थानों में ब्रिटिश काल के सिलेबस ही थे, लेकिन धीरे-धीरे कुछ परिवर्तन हुआ.
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