एक मकान में लगे हैं कई बिजली मीटर? जानिए किसे और कैसे देना होगा संपत्ति कर, 4.80 लाख लोगों का आया डेटा
यशपाल मीणा, नगर आयुक्त
Patna Municipal Corporation Property Tax: यदि आपके घर में एक से अधिक बिजली मीटर लगे हैं या भाइयों के बीच बंटवारा हुआ है, तो संपत्ति कर को लेकर आपकी उलझन अब दूर होने वाली है. नगर निगम के कॉलिंग अभियान के दौरान 4.80 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं की पहचान के बाद नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने प्रॉपर्टी टैक्स निर्धारण से जुड़े सभी सवालों पर स्थिति स्पष्ट कर दी है.
Patna Municipal Corporation Property Tax: पटना नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा कि किसी भवन में अलग-अलग बिजली मीटर लगे होने से यह जरूरी नहीं हो जाता कि वहां की हर इकाई अलग प्रॉपर्टी मानी जाए. एक भवन में मौजूद सभी फ्लैट और दूसरी कर योग्य इकाइयों का प्रॉपर्टी टैक्स तय होना जरूरी है. यह काम एक ही प्रॉपर्टी आइडी यानी PID पर हो सकता है या जरूरत के अनुसार अलग-अलग PID पर भी किया जा सकता है.
अगर भवन की सभी इकाइयों का कर पहले ही एक या अलग-अलग PID के तहत तय हो चुका है, तो केवल अलग बिजली उपभोक्ता होने के कारण दोबारा प्रॉपर्टी टैक्स निर्धारण कराने की जरूरत नहीं है.
भाइयों में बंटवारा नहीं हुआ तो कर कौन देगा?
अगर किसी प्रॉपर्टी का कानूनी तौर पर बंटवारा नहीं हुआ है, तो जिन लोगों के नाम पर वह प्रॉपर्टी दर्ज है, उन्हीं की जिम्मेदारी संपत्ति कर चुकाने की होगी. लेकिन भाइयों के बीच विधिवत बंटवारा हो चुका है और हर भाई का हिस्सा अलग संपत्ति के रूप में तय है, तो हर हिस्से का अलग संपत्ति कर निर्धारण कराना होगा.
4.80 लाख बिजली उपभोक्ताओं ने बताई यह बात
प्रॉपर्टी टैक्स का दायरा बढ़ाने के लिए नगर निगम की ओर से की जा रही कॉलिंग में अब तक 480437 बिजली उपभोक्ताओं ने स्वीकार किया है कि वे संपत्ति कर नहीं देते हैं और उनकी संपत्ति का अभी तक कर निर्धारण नहीं हुआ है. इन संपत्तियों को अब तीन स्तरीय राजस्व संवर्धन अभियान के तहत कर के दायरे में लाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
5 लाख से ज्यादा संपत्तियों को टैक्स के दायरे में लाने का लक्ष्य
जनगणना 2027 के पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करते समय करीब 4.60 लाख मकान चिह्नित हुए हैं. नगर निगम के रिकॉर्ड में अभी तक करीब 3.10 लाख संपत्तियों का ही संपत्ति कर निर्धारित हुआ है. नगर निगम अब भवन, भूखंड और दूसरी कर योग्य संपत्तियों को मिलाकर 5 लाख से अधिक संपत्तियों को प्रॉपर्टी टैक्स के दायरे में लाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है.
मकान में दुकान भी है तो कैसे लगेगा टैक्स?
अगर किसी आवासीय भवन में रहने के साथ व्यावसायिक काम भी होता है, तो प्रॉपर्टी टैक्स उसके PID के आधार पर तय होगा. अगर दुकान और आवास के लिए अलग-अलग PID हैं, तो दोनों का संपत्ति कर अलग-अलग निर्धारित किया जाएगा. अगर एक ही PID में आवासीय और व्यावसायिक दोनों तरह के इस्तेमाल की जानकारी दर्ज है और उसी आधार पर स्व-कर निर्धारण किया गया है, तो उसी PID के तहत संपत्ति कर तय होगा.
सोसाइटी के हर फ्लैट का भी होगा कर निर्धारण
नगर निगम के मुताबिक सोसाइटी क्षेत्र की कर योग्य संपत्तियां भी प्रॉपर्टी टैक्स के दायरे से बाहर नहीं रहेंगी. हर कर योग्य फ्लैट या संपत्ति का नियम के अनुसार संपत्ति कर निर्धारण कराना जरूरी होगा. यानी सोसाइटी में रहने वाले संपत्तिधारकों की कर देनदारी उनकी संबंधित प्रॉपर्टी के आधार पर तय होगी.
राजीव नगर की जमीन पर क्या होगा?
राजीव नगर की 1024 एकड़ जमीन का मामला भी प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े सवालों में शामिल है. इस जमीन को आवास बोर्ड ने 1974 में अधिग्रहित किया था और इसका मामला अभी अदालत में चल रहा है. नगर निगम के अनुसार इस मामले में सक्षम प्राधिकार के निर्देश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
नगर निगम क्यों बढ़ा रहा संपत्ति कर का दायरा?
प्रॉपर्टी टैक्स नगर निकाय की आय मेन सोर्स है. बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 के बजट प्रावधानों के अनुसार नगर निकायों के वित्तीय संसाधनों का कम से कम 25 प्रतिशत शहरी गरीबों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाना है. यह व्यवस्था 74वें संविधान संशोधन की 12वीं अनुसूची में नगर निकायों को दी गई जिम्मेदारियों से भी जुड़ी है.
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टैक्स से मिलने वाले पैसे का कहां होगा इस्तेमाल?
नगर निगम का कहना है कि ज्यादा संपत्ति कर जुटाने का मकसद सिर्फ राजस्व बढ़ाना नहीं है. इससे मिलने वाले अतिरिक्त पैसे का इस्तेमाल नागरिक सुविधाओं, शहर के विकास और जनहित से जुड़े कामों को मजबूत करने में किया जाएगा. कौन-सी योजना कब शुरू होगी, यह जरूरत और प्राथमिकता के आधार पर सक्षम प्राधिकार तय करेगा.
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