रजौली अस्पताल में अपनी ड्यूटी से निकले डॉक्टर, 100 मीटर दूर निजी क्लिनिक में देखने लगे मरीज
निजी क्लिनिक के बोर्ड पर लगा चिकित्सक का नाम व बैठे मरीज | Prabhat Khabar Network
सरकारी ड्यूटी छोड़ निजी क्लिनिक चलाने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई की तलवार. स्वास्थ्य विभाग ने मांगी स्पष्टीकरण, ग्रामीणों को सता रही इलाज की चिंता.
Nawada News : रजौली स्थित 75 शैय्या अनुमंडलीय अस्पताल में इन दिनों मौसमी बीमारियों के प्रकोप के कारण दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज की आस लेकर पहुंच रहे हैं. हालांकि, अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों की मनमानी के कारण मरीजों को समुचित इलाज मिलने के बजाय भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है. ओपीडी सेवा के निर्धारित समय (सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक) के दौरान जब मरीजों की लंबी कतारें अस्पताल परिसर में लगी रहती हैं, तब डॉक्टर सरकारी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर अपने निजी क्लिनिक चमकाने में व्यस्त रहते हैं.
ऐसा ही एक ताजा वाकया शुक्रवार की दोपहर करीब 12:30 बजे देखने को मिला, जब रोस्टर के अनुसार ओपीडी ड्यूटी में तैनात चिकित्सक डॉ. श्याम नंदन प्रसाद अस्पताल में अपनी कुर्सी खाली छोड़कर परिसर से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित अपने निजी स्वास्तिक क्लिनिक में धड़ल्ले से मरीजों का इलाज करते पाए गए.

एक डॉक्टर के भरोसे ओपीडी, बेबस दिखे दूर-दराज के मरीज
अनुमंडलीय अस्पताल की ओपीडी ड्यूटी में कुल चार चिकित्सकों डॉ. श्याम नंदन प्रसाद, डॉ. नीतीश कुमार, डॉ. निवेदिता नंदिनी और डॉ. दिलीप कुमार का नाम शामिल था. इनमें से डॉ. दिलीप कुमार पीएचसी में आयोजित एक आधिकारिक बैठक में शामिल होने गए थे, जबकि डॉ. श्याम नंदन प्रसाद बिना किसी सूचना के ड्यूटी छोड़कर अपने स्वास्तिक क्लिनिक में निजी प्रैक्टिस में जुट गए. इस कारण ओपीडी में मरीजों का भारी दबाव अकेले डॉ. नीतीश कुमार के कंधों पर आ गया.
अस्पताल के कमरों के बाहर महिला, वृद्ध और बच्चों समेत दर्जनों मरीज घंटों से अपनी बारी का इंतजार करते रहे, जबकि अंदर सिर्फ एक चिकित्सक ही मरीजों की जांच कर पा रहे थे. डॉक्टरों की इस अनुपस्थिति और लापरवाही से नाराज ग्रामीण मरीजों ने बताया कि यहां अक्सर सरकारी समय में डॉक्टर गायब रहते हैं, जिससे मजबूरन लोगों को निजी क्लिनिकों का रुख करना पड़ता है या खाली हाथ लौटना पड़ता है.

जांच और सख्त विभागीय कार्रवाई का मिला आश्वासन
अस्पताल में चल रही इस अफरा-तफरी और चिकित्सकों की मनमानी का भंडाफोड़ तब हुआ जब लोगों की शिकायत के बाद मौके पर मौजूद पत्रकारों ने अस्पताल की खाली ओपीडी कुर्सी तथा निजी क्लिनिक में चल रहे इलाज का वीडियो साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड किया. पूरे मामले की जानकारी जब वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों और अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक को दी गई. तब नवादा के सिविल सर्जन बिनोद कुमार चौधरी ने स्पष्ट रूप से कहा कि ड्यूटी आवर में सरकारी अस्पताल छोड़कर निजी क्लिनिक चलाना पूरी तरह से गैरकानूनी और नियमों का उल्लंघन है.
उन्होंने वीडियो साक्ष्यों के आधार पर मामले का संज्ञान लेते हुए आश्वस्त किया कि संबंधित अनुपस्थित चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों के खिलाफ सख्त अनुशासनिक व विभागीय कार्रवाई की जाएगी. वहीं दूसरी ओर अनुमंडल पदाधिकारी स्वतंत्र कुमार सुमन ने बताया मिली जानकारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बात कर रहे हैं.
इधर अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ दिलीप कुमार ने बताया कि वे पीएचसी में स्वास्थ्य से संबंधित मीटिंग में शामिल होने के लिए आए हैं. वैसे क्या मामला है, बात कर जानकारी लेते हैं.
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