छत व छज्जे बन रहे गार्डेन

Updated at : 24 Dec 2016 7:56 AM (IST)
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छत व छज्जे बन रहे गार्डेन

नवादा नगर : घर के आगे या पीछे रहनेवाला गार्डेन शहर में घटती जमीन का विकल्प अब छत व छज्जे बन रहे हैं. महंगी होती जमीन के कारण लोग थोड़ी सी भी जमीन इस कार्य के लिए नहीं छोड़ पा रहे हैं. नतीजा यह है कि लोगों की शौक व जरूरत केवल दिखावा बन कर […]

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नवादा नगर : घर के आगे या पीछे रहनेवाला गार्डेन शहर में घटती जमीन का विकल्प अब छत व छज्जे बन रहे हैं. महंगी होती जमीन के कारण लोग थोड़ी सी भी जमीन इस कार्य के लिए नहीं छोड़ पा रहे हैं. नतीजा यह है कि लोगों की शौक व जरूरत केवल दिखावा बन कर रह गया है. जिला मुख्यालय की बात तो दूर अब गांवों में भी लोग अपने घरों के आगे किचेन गार्डेन के लिए जगह नहीं बचा पाते हैं. घर के आगे या पीछे बची जमीन पर लोग फूलों का शौक पूरा करने के साथ सिजनल सब्जियों को उपजाया करते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यवस्था समाप्त होकर लोग बाजार में मिलने वाले रंगे, उर्वरक व कीटनाशकों द्वारा उपजने वाले सब्जियों पर अपनी निर्भरता बढ़ा ली है. जगह के अभाव के कारण छतों या छज्जे पर उगाये जा सकने वाली फूलों या थोड़ी जगह बना कर किचन गार्डेन का शौक लोग पूरा कर रहे हैं.
आकर्षक फूलों के साथ शो प्लांट
नर्सरियों में अब पारंपरिक गेंदा, गुलाब, चमेली जैसी फूलों के साथ ही इतनी अधिक फूलों के प्रकार उपलब्ध हैं कि लोग इसे आसानी से घरों में गमलों के अलावे बेकार पड़े अन्य सामान में लगाते दिखते हैं.
डहेलिया व गुलदाउदी के विभिन्न रंगों के वेराइटी के अलावे पुतुनिया, सालविया, डंढस, केंदुला, इनपैशन, आदि फूल भी हमेशा मांग के अनुसार उपलब्ध मिलते हैं. शो प्लांट के रूप में भी दर्जनों आकार प्रकार के आकर्षक रंग रूप में शो प्लांट मिल जाते हैं. मोर पंखी, आर्केडिया, डायसन, चाइनीज पंप, करोटन, इंसोफ इंडिया, लैला मजनू जैसे प्लांट बड़े ही आसानी से बाजार में मिल जाते हैं, जो घरों की रौनक को बढ़ते हैं.
प्लास्टिक बैग में बागबानी : कम समय व छोटे से स्थान में उगाये जा सकने वाले नींबु, अनार, आम, अमरूद आदि के बोनसाई पौधे कई लोग अपने घरों के छतों पर लगाये दिख जाते हैं. छतों पर उगाये गये फलों के स्वाद व फूलों की सुगंध की बात ही अलग होती है. नगर के न्यू एरिया, नवीननगर, वीआइपी कॉलोनी आदि मुहल्ले में लोगों के घरों के छतों पर सजने वाला यह प्लांट गमलों के साथ ही फाइबर के बड़े डब्बे व अन्य उपलब्ध सामान में लगाते हैं.
अब प्लास्टिक बैग में भी मिट्टी भर कर लोग छत या छज्जा पर बागबानी का आनंद ले रहे हैं. बदलते हुए नये दौर ने टैरिस या किचेन गार्डेन के महत्व को बढ़ा दिया है. हरी सब्जियों की खेती भी बहुत से घरों में आसानी से होते दिखता है. सीजन के मुताबिक हरी मिर्च, टमाटर, बैंगन, भिंडी जैसी सब्जियों को लगे कई छतों पर दिख जाता है.
लोगों ने विकल्प के रूप में अपनाया : आज लोगों ने किचन गार्डेन या टैरिस गार्डेन को विकल्प के रूप में स्वीकारने लगे हैं. हरियाली के लिए जमीन में हिस्सों की कमी लोग छतों पर फूल के पौधे लगा कर करते दिखते हैं. इस प्रकार की सोच को और भी आगे तक ले जाने की जरूरत है. नर्सरी वाले अभिषेक कुमार ने कहा कि नर्सरी के व्यवसाय में अब पहले की अपेक्षा मांग में बढ़ोतरी हुई है. लोगों के पसंद के अनुसार सीजनल व विशेष डिमांड को पूरा करना पड़ता है. छोटे से स्पेस में भी लोग बेहतर करने की इच्छा रखते दिखते हैं.
फूलों की नर्सरी का है बड़ा कारोबार
शहर में फूल के पौधे लगाने के शौकीन की संख्या लगातार बढ़ रही है. ग्रीन नवादा बनाने की सोच से भी अपने घरों की हरियाली बनाये रखने के लिए किचेन गार्डेन का सहारा लेते हैं.
गमलों में खूबसूरत फूलों के पौधों की रंग-बिरंगी दुनिया सजाने का प्रयास करते घर के सदस्य दिख जाते हैं. जिला मुख्यालय में प्राइवेट स्तर पर चलाये जा रहे तीन से चार नर्सरियों में नये व आकर्षक फूलों की डिमांड देखने को मिलती है. तरह-तरह के देशी व विदेशी प्रजाति के फूल जिसकी खूबसूरती सबों को प्रभावित करे, इसके लिए लोग ऊंची कीमत भी खर्च करने को तैयार दिखते हैं.
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