पूरी होती है मन से मांगी गयी मुरादें

Updated at : 15 Nov 2015 6:59 PM (IST)
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पूरी होती है मन से मांगी गयी मुरादें

पूरी होती है मन से मांगी गयी मुरादें फोटो-1हंडिया गांव स्थित हैं द्वापर युग का सूर्य मंदिर प्रतिनिधि, नारदीगंज देश के पौराणिक व ऐतिहासिक सूर्य मंदिरों में शुमार है हंडिया गांव का सूर्य नारायण मंदिर. लोगों को कहना है कि यह द्वापर युग का है. हालांकि, जितना पुराना यह मंदिर है उस तरह से इसका […]

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पूरी होती है मन से मांगी गयी मुरादें फोटो-1हंडिया गांव स्थित हैं द्वापर युग का सूर्य मंदिर प्रतिनिधि, नारदीगंज देश के पौराणिक व ऐतिहासिक सूर्य मंदिरों में शुमार है हंडिया गांव का सूर्य नारायण मंदिर. लोगों को कहना है कि यह द्वापर युग का है. हालांकि, जितना पुराना यह मंदिर है उस तरह से इसका विकास नहीं हुआ है. यह इतिहासकार व पुरातत्व विशेषज्ञों की निगाह से ओझल और उपेक्षित है. सरकार व प्रशासन के तरफ से भी मंदिर की पौराणिकता की अनदेखी की गयी है. श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां पूजा-अर्चना करने और सच्चे मन से मांगी गयी हर मुरादें पूरी होती है. कोई भी याचक यहां से खाली हाथ नहीं लौटता. मंदिर के बारे में बताया जाता है कि द्वापर में मगध सम्राट जरासंध के समय राजधानी राजगीर ( राजगृह ) थी. किवदंतियां है कि जरासंध की बेटी धन्यावति अपने अराध्यदेव भगवान शिव-पार्वती की पूजा अर्चना करने के लिए धनियावां पहाड़ी स्थित मंदिर में इसी मार्ग से प्रतिदिन जाती थीं. यहां स्थित तालाब में स्नान कर भगवान सूर्य की पूजा अर्चना भी करती थी. कंचन होती है काया आम धारना है कि मंदिर के निकट स्थित सरोवर में स्नान के उपरांत भगवान सूर्यदेव की पूजा अर्चना करने वाला कोई भी याचक खाली हाथ नहीं लौटता. सरोवर में स्नान करनेवाले को कुष्ठ समेत अन्य चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है. उनकी काया कंचन हो जाती है़ प्रत्येक रविवार को पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का ताता लगा रहता है. श्रद्धालु रविवार को नमक वर्जित कर सूर्यपासना करते हैं. मन्नतें पूरी होने पर बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराते हैं. कार्तिक माह के अलावा चैत माह में भी लोग आस्था के पावन छठ पर्व में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है. नहीं होती कोई प्रशासनिक व्यवस्था सूर्योपासना को लेकर काफी संख्या में श्रद्धालु अर्घ दान करने के लिए पहुंचते हैं. नहाय-खाय से लेकर पहली अर्घ की रात तक व्रती मंदिर के परिसर में रात गुजारते हैं. श्रद्धालुओं के अलावा दूर-दराज के लोगों द्वारा विभिन्न तरह के स्टॉल लगा कर पूजा सामग्री की बिक्री के अलावा अन्य समान की बिक्री को लेकर काफी भीड़ रहती है. लेकिन, प्रशासनिक स्तर पर इन लोगों की सुरक्षा व सुविधा के लिए कुछ भी नहीं किया जाता है. ग्रामीणों द्वारा मंदिरों के आसपास सफाई, सड़क की सफाई, तालाब की सफाई, रोशनी, पेयजल की व्यवस्था के अलावा श्रद्धालुओं की व्यवस्था करते हैं. पर्व के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के अलावा मनोरंजन की व्यवस्था की जाती है.

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