मूल्यांकन कार्य में देरी से मैट्रिक परीक्षार्थियों में छायी मायूसी

Updated at : 08 May 2015 8:22 AM (IST)
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मूल्यांकन कार्य में देरी से मैट्रिक परीक्षार्थियों में छायी मायूसी

कम होती जा रही अच्छे संस्थानों में नामांकन की उम्मीदें मूल्यांकन केंद्रों पर पसरे सन्नाटे से अभिभावकों में भी चिंता रिजल्ट देर से आने का खामियाजा कई मेधावी विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा नियोजित शिक्षकों की हड़ताल में एक-एक कर विभिन्न कोटि के शिक्षकों के शामिल होते जाने से सर्वाधिक असर मूल्यांकन कार्यो पर पड़ा बिहारशरीफ. […]

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कम होती जा रही अच्छे संस्थानों में नामांकन की उम्मीदें
मूल्यांकन केंद्रों पर पसरे सन्नाटे से अभिभावकों में भी चिंता
रिजल्ट देर से आने का खामियाजा कई मेधावी विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा
नियोजित शिक्षकों की हड़ताल में एक-एक कर विभिन्न कोटि के शिक्षकों के शामिल होते जाने से सर्वाधिक असर मूल्यांकन कार्यो पर पड़ा
बिहारशरीफ. नियोजित शिक्षकों के अनिश्चितकालीन हड़ताल के लंबा खींचने से जहां जिले के विभिन्न स्तरों के विद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य बाधित हुआ.
वहीं मैट्रिक परीक्षा की उतर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य भी ठप रहा. इससे मैट्रिक विद्यार्थियों के परीक्षाफल देर से आने के कारण उन्हें कई अवसरों से हाथ धोना पड़ेगा. विदित हो कि विगत चार अप्रैल से शुरू हुए नियोजित शिक्षकों की इस हड़ताल में एक-एक कर विभिन्न कोटि के शिक्षकों के शामिल होते जाने से सर्वाधिक असर मूल्यांकन कार्यो पर पड़ा. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पटना द्वारा विगत 15 अप्रैल से उतर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य शुरू किया गया था. इसके लिए जिले के पांच उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में मूल्यांकन केंद्र भी बनाये गये थे.
इनमें से कई मूल्यांकन केंद्रों पर परीक्षकों द्वारा अपना योगदान भी दिया गया था, लेकिन शिक्षकों के आंदोलन के उत्तरोतर तेज होते जाने से परीक्षक मूल्यांकन कार्य शुरू नहीं कर सके. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के निर्देशानुसार 25 अप्रैल तक उतर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य पूरा कर लिया जाना था तथा विगत कई वर्षो की तरह मैट्रिक का परीक्षा परिणाम 20-25 मई तक प्रकाशित भी कर दिया जाना था.
अब स्थिति यह है कि हड़ताल के लंबा खींचते चले जाने से मैट्रिक परीक्षार्थियों के दिलों की धड़कनें बढ़ने लगी है तथा उनके अभिभावकों के चेहरों पर चिंता की लकीरें लंबी होने लगी है.
सभी लोग जानते हैं कि सूबे का मैट्रिक रिजल्ट देर से आने का खामियाजा कई मेधावी विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा. उनका नामांकन दूसरे प्रदेशों के अच्छे संस्थानों में नही हो सकेगा. कई संस्थानों तथा बोर्ड, यूनिवर्सिटी में यहां का रिजल्ट आने के पूर्व हाउस फूल का बोर्ड टंग जायेगा. जिले के मेधावी छात्रों के सपनों पर हड़ताल के कारण ग्रहण लगता दिख रहा है.
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