15 दिन पहले मां-पिता से मिलने गये थे बिहारशरीफ
Updated at : 23 Dec 2014 8:21 AM (IST)
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छपरा/बिहारशरीफ : अपराधियों के हाथों शहीद हुए सारण के इसुआपुर थानाध्यक्ष संजय कुमार तिवारी नालंदा जिले के लहेरी थाना क्षेत्र के मुरारपुर ब्रह्म स्थान के रहनेवाले थे. सोमवार को घटना की सूचना के तत्काल बाद इनके माता-पिता छपरा पहुंच गये. इधर, संजय उर्फ बबलू की मृत्यु की खबर जैसे ही मुहल्ले में फैली पूरा मुहल्ला […]
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छपरा/बिहारशरीफ : अपराधियों के हाथों शहीद हुए सारण के इसुआपुर थानाध्यक्ष संजय कुमार तिवारी नालंदा जिले के लहेरी थाना क्षेत्र के मुरारपुर ब्रह्म स्थान के रहनेवाले थे. सोमवार को घटना की सूचना के तत्काल बाद इनके माता-पिता छपरा पहुंच गये. इधर, संजय उर्फ बबलू की मृत्यु की खबर जैसे ही मुहल्ले में फैली पूरा मुहल्ला गम में डूब गया.
2009 बैच के पुलिस पदाधिकारी संजय कुमार तिवारी के बड़े भाई संतोष तिवारी दिल्ली में इंजीनियर हैं,जबकि सबसे छोटा भाई संजीव तिवारी बेंगलुरु में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर रहे हैं. इनके पिता मुहल्ले में पूजा-पाठ कराते हैं.बहुत साधारण परिवार से संबंध रखनेवाले संजय कुमार तिवारी पंद्रह दिन पूर्व ही अपनी पत्नी व एक वर्ष के पुत्र के साथ बिहारशरीफ आये थे.पुन: जल्द आने की बात उन्होंने कही थी.श्री तिवारी के मकान में किराये पर रहनेवाली अनीता देवी बताती है कि वे काफी मिलनसार थे. कभी यह एहसास नहीं हुआ कि मैं उनके घर की किरायेदार हूं.पड़ोस की शांति देवी कहती हैं कि बाबू हमें चाची कह कर पुकारते थे.
घर आने पर आस-पड़ोस के बड़े बुजुर्गो को पैर छू कर आशीर्वाद लिया करते थे. पास की एक दूसरी बुजुर्ग महिला ने बताया कि विश्वास ही नहीं हो रहा है कि बबलू(घर का पुकारू नाम) अब नहीं रहे. पड़ोस के मुंह बोले चाचा उमेश प्रसाद ने बताया कि 2009 में मुहल्ले के तीन मेधावी लड़के ने कठिन परिश्रम के बाद पुलिस विभाग में नौकरी लेने में कामयाबी हासिल की थी,जिसमें संजय के अलावा हमारा पुत्र शिव शंकर सिंह व रविशंकर शामिल है. श्री प्रसाद ने बताया कि कानून उन अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दे.घटना की सूचना पर लहेरी इंस्पेक्टर ओम प्रकाश सिंह व दीपनगर थानाध्यक्ष राजनंदन संजय के परिजनों से परिवार से मिलने घर पहुंचे. दीपनगर थानाध्यक्ष ने बताया कि संजय तिवारी हमारे बैच के थे.वह काफी हिम्मतवाले पुलिस ऑफिसर थे.
अपराधियों ने इनको बनाया था निशाना
सबसे पहले वर्ष 1998 में मकेर के थानाध्यक्ष अनिल कुमार को अपराधियों ने गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया था, जिसके बाद 1999 में मशरक के थानाध्यक्ष गोपालजी मिश्र को अपराधियों ने अपना निशाना बनाया. वर्ष 2000 में गड़खा के थानाध्यक्ष रामसुंदर प्रसाद को अपराधियों ने उस समय गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया जब वह पुलिस मुख्यालय से गड़खा लौट रहे थे. उसी समय गड़खा ढाला के समीप अपराधियों ने सरेआम रामसुंदर को गोली मार कर मौत के घाट उतारदिया था.
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