रूफ टॉप सोलर: अब सरकारी स्कूलों में नहीं कटेगी लाइट, बिजली बिल भी होगा कम

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छत पर लगा सोलर प्लेट, फोट- सांकेतिक, AI जेनरेटेड

मुजफ्फरपुर के सरकारी विद्यालयों में अब सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध कराने की तैयारी है. शिक्षा विभाग ने 2029-30 तक सभी स्कूलों को रूफटॉप सोलर सिस्टम से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है. योजना की निगरानी के लिए जिला स्तर पर नोडल अधिकारी बनाया गया है.

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सरकारी स्कूल सोलर पावर: जिले के सरकारी विद्यालय अब पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम कर सौर ऊर्जा की ओर बढ़ेंगे. शिक्षा विभाग ने जिले के सभी सरकारी स्कूलों की छतों पर रूफटॉप सोलर पावर सिस्टम लगाने की तैयारी शुरू कर दी है. योजना को वर्ष 2029-30 तक शत-प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इससे स्कूलों में बिजली की उपलब्धता बेहतर होने के साथ बिजली बिल का खर्च भी कम होने की उम्मीद है.

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ब्रेडा लगाएगा ग्रिड कनेक्टेड सोलर प्लांट

विद्यालयों में बिहार रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (ब्रेडा) के माध्यम से रेस्को मॉडल के तहत ग्रिड कनेक्टेड सोलर प्लांट लगाए जाएंगे. इस मॉडल के तहत स्कूलों की छतों का उपयोग सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाएगा. शिक्षा विभाग ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी और सर्व शिक्षा अभियान के डीपीओ को दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

डीपीओ को बनाया गया नोडल अधिकारी

योजना की निगरानी और समीक्षा के लिए डीपीओ प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान को जिला स्तरीय नोडल पदाधिकारी बनाया गया है. नोडल पदाधिकारी को निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्यों की प्रगति सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी गई है. साथ ही ब्रेडा के सहायक परियोजना अभियंता के साथ समन्वय बनाकर काम करने का निर्देश दिया गया है.

हर 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

शिक्षा विभाग ने योजना की प्रगति पर नियमित निगरानी के लिए हर 15 दिन में निर्धारित प्रारूप पर रिपोर्ट भेजने को कहा है. रिपोर्ट में सोलर प्लांट लगाने की स्थिति, लंबित मामलों और काम के दौरान सामने आ रही समस्याओं का विवरण देना होगा. तकनीकी या प्रशासनिक बाधा आने पर संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर उसका समाधान कराया जाएगा.

बिजली बिल का खर्च होगा कम

जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमार अरविंद सिन्हा ने बताया कि स्कूलों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगने से निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. इससे विद्यालयों पर बिजली बिल का वित्तीय भार भी कम होगा. सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से स्कूलों में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा.

बच्चों को मिलेगा ग्रीन एनर्जी का व्यावहारिक ज्ञान

सरकारी स्कूलों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगने का फायदा केवल बिजली आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा. बच्चे स्कूल परिसर में सौर ऊर्जा उत्पादन की व्यवस्था को करीब से देख सकेंगे. इससे उनमें ग्रीन एनर्जी, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर व्यावहारिक समझ विकसित होने की उम्मीद है. 2029-30 तक लक्ष्य पूरा होने पर जिले के सभी सरकारी विद्यालय स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम उठा सकेंगे.

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