फरक्का जल संधि के खिलाफ जदयू का जनजागरूकता अभियान, बिहार के हित में नवीनीकरण का विरोध
प्रेस वार्ता में मौजूद पार्टी पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि
जदयू ने फरक्का जल संधि को बिहार के हित में न बताते हुए इसके नवीनीकरण का विरोध किया है. पार्टी का कहना है कि 2050 तक बिहार की जल आवश्यकताओं को संधि में शामिल किया जाना चाहिए. इस मुद्दे पर पार्टी जनजागरूकता अभियान चला रही है.
मुजफ्फरपुर: जिला जदयू मुजफ्फरपुर प्रधान कार्यालय के कर्पूरी सभागार में गुरुवार को फरक्का जल संधि को लेकर प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अनुपम कुमार ने की. उन्होंने फरक्का जल संधि पर चलाये जा रहे ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम और इसके उद्देश्यों की जानकारी दी.
जिलाध्यक्ष ने कहा कि जदयू का स्पष्ट स्टैंड है कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि भारत, खासकर बिहार के हित में नहीं है. उन्होंने कहा कि संधि का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए. यदि कोई संधि होती भी है तो उसमें बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए.
गंगा किनारे बसे 12 जिलों में चल रहा संवाद
प्रेस वार्ता में बताया गया कि जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम के तहत गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में संवाद कर रहे हैं. इनमें बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार शामिल हैं.
पार्टी के अनुसार, यह अभियान पांच सितंबर को बक्सर से शुरू हुआ है और इसका समापन कटिहार में होगा. बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है.
बिहार के जल प्रबंधन पर असर का दावा
जिलाध्यक्ष ने कहा कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार का जल-प्रबंधन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और राज्य गंभीर जल-संकट का सामना कर रहा है. जदयू का कहना है कि यह सीधे तौर पर बिहार की हकमारी है. पार्टी ने आरोप लगाया कि बिहार और केंद्र की तत्कालीन सरकार में बैठे लोगों ने बिहार के हितों की अनदेखी की.
उन्होंने कहा कि इसका असर बिहार के किसानों की सिंचाई, लोगों के पेयजल, उद्योगों की पानी की जरूरत, लाखों लोगों की आजीविका और राज्य के युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है.
राज्यसभा में भी उठाया गया मुद्दा
जदयू ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने हाल में संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया था. पार्टी के अनुसार, उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और यदि कोई संधि होती भी है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए.
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी लगातार फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से बिहार को होने वाले नुकसान की बात कहते रहे हैं.
‘यह बिहार के हक की बात है’
कांटी विधायक ई. अजीत कुमार ने कहा कि ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है. उन्होंने कहा कि पार्टी की यह पहल किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि जनसरोकार से जुड़ी है. पार्टी बिहार की आवाज केंद्र तक पहुंचाना चाहती है, ताकि गंगा से जुड़े सवाल देश के सामने आयें और फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार हो.
सकरा विधायक आदित्य कुमार ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय संधि का 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है. उन्होंने इसे बिहार के साथ ज्यादती बताया.
महानगर अध्यक्ष प्रो. अरुण पटेल ने कहा कि जदयू संधि के नवीनीकरण का कड़ा विरोध कर रही है और जनता के बीच जाकर इसके प्रभावों की जानकारी दे रही है. उन्होंने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रयासों से यह मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श का विषय बन चुका है.
प्रेस वार्ता में कांटी विधायक ई. अजीत कुमार, सकरा विधायक आदित्य कुमार, महानगर अध्यक्ष प्रो. अरुण पटेल, प्रो. शब्बीर अहमद, हरिओम कुशवाहा, कुंदन शांडिल्य, अमरनाथ चंद्रवंशी, आशिक झा, अम्बरीष कुमार सिन्हा, राजीव रंजन, दिलीप राज सहनी, चंदन ठाकुर, नगीना पासवान, सुशील कुमार और साकेत कुमार मौजूद थे.
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