मुजफ्फरपुर : डायरिया व निमोनिया से मरनेवाले बच्चों की संख्या अधिक

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मुजफ्फरपुर : बच्चों में निमोनिया व डायरिया की रोकथाम और नियंत्रण के लिए हम सभी को प्रयास करना होगा, ताकि हम अपने जिले से इसको खत्म कर सके. इसमें सभी की भूमिका अति महत्वपूर्ण है. हमारा विभाग यूनिसेफ के साथ मिल कर इसके लिए काम कर रहा है. उक्त बातें मिठनपुरा स्थित पार्क होटल में […]

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मुजफ्फरपुर : बच्चों में निमोनिया व डायरिया की रोकथाम और नियंत्रण के लिए हम सभी को प्रयास करना होगा, ताकि हम अपने जिले से इसको खत्म कर सके. इसमें सभी की भूमिका अति महत्वपूर्ण है. हमारा विभाग यूनिसेफ के साथ मिल कर इसके लिए काम कर रहा है. उक्त बातें मिठनपुरा स्थित पार्क होटल में यूनिसेफ की ओर से आयोजित ‘निमोनिया व डायरिया की रोकथाम’ कार्यशाला में सीएस डॉ शिवचंद्र भगत ने कही.
कार्यक्रम का उद्घाटन सीएस शिव चंद्र भगत, अनिरूद्ध कुमार, क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन, डॉ सैयद हुब्बे अली, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, यूनिसेफ, डॉ सरिता वर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी, यूनिसेफ, प्रशांत कुमार, क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक, राज देव प्रसाद सिंह, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी व भगवान प्रसाद वर्मा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने किया. उद्घाटन के बाद डॉ सैयद हुब्बे अली ने कहा कि जैसे कि हम जानते हैं कि बिहार में करीब एक लाख 20 हजार बच्चे प्रति वर्ष 5 साल की उम्र तक भी जी नहीं पाते हैं. जबकि, तुरंत उचित उपाय कर बाल मृत्यु दर में कमी लायी जा सकती है. ऐसा माना गया है कि प्रति वर्ष 5 वर्ष के अंदर करीब 19 हजार बच्चे निमोनिया व 13 हजार बच्चे डायरिया से मर जाते हैं.
एनएफएचएस 2015 के सर्वे के हिसाब से तिरहुत प्रमंडल में डायरिया व निमोनिया से मरनेवाले बच्चों की संख्या सबसे अधिक है. यूनिसेफ निमोनिया व डायरिया की रोकथाम के लिए काम कर रहा है.
आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी को किया जा रहा प्रशिक्षित
प्रशिक्षक प्रखंडों में जाकर आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर रहे हैं. कार्यशाला में पहली बार चार स्किल स्टेशन के माध्यम से प्रतिभागियों को पोस्टर, लिफ्लेट, उपकरणों का प्रदर्शन व उपयोग करने के तरीकों के बारे में बताया गया. इसमें पहले स्किल स्टेशन में सामुदायिक स्तर पर डायरिया की रोकथाम एवं प्रबंधन, सही तरह से हाथ की सफाई, ओआरएस बनाने का सही तरीका और जिंक की गोली के उपयोग को प्रदर्शित किया गया. दूसरे स्किल स्टेशन में निमोनिया प्रबंधन में इसकी पहचान के तरीकों एवं प्रबंधन, बच्चों में कुपोषण की माप, बच्चों का वजन लेने के सही तरीके को प्रदर्शित किया गया. तीसरे स्किल स्टेशन में सामुदायिक स्तर पर बच्चों में तेज सांस की गिनती एवं तापमान को मापने, लंबाई को मापने के तरीकों को प्रदर्शित किया गया. जबकि, चौथे स्किल स्टेशन में सामुदायिक स्तर पर स्तनपान के सही तरीकों और बच्चों की ग्रोथ माॅनिटरिंग के तरीकों के बारे में जानकारी दी गयी.
कार्यक्रम में आशीष कुमार, राजेश कुमार यूनिसेफ समेत कार्यशाला में जिले के जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, जिला मूल्यांकन, अनुश्रवण पदाधिकारी, जिला सामुदायिक उत्प्रेरक, अस्पताल प्रबंधक, पीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी व प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधकों ने भाग लिया.
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