लीची को रास नहीं आ रहा मौसम, आधा हुआ वजन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :30 May 2018 5:37 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर : अपनी शाही लीची का वजन पिछले 15 साल में घट कर आधा रह गया है. पहले लीची 35 से 40 ग्राम की होती थी. अब इसका वजह 15 से 20 ग्राम के बीच रह गया है. इसकी मुख्य वजह मौसम व मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी को माना जा रहा है. लीची […]
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मुजफ्फरपुर : अपनी शाही लीची का वजन पिछले 15 साल में घट कर आधा रह गया है. पहले लीची 35 से 40 ग्राम की होती थी. अब इसका वजह 15 से 20 ग्राम के बीच रह गया है. इसकी मुख्य वजह मौसम व मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी को माना जा रहा है. लीची का फल के तैयार होने के समय लगातार पूरबा हवा चलने और मिट्टी में क्षारीय तत्व (पीएच) बढ़ने से भी लीची के वजन व आकार पर असर पड़ा है.
किसान कहते हैं कि पहले लीची रसगुल्ला के बराबर होती थी. पांच साल पहले तक एक सामान्य पेड़ से औसतन डेढ़ क्विंटल लीची का उत्पादन होता था, जो अब घट कर एक क्विंटल रह गया है. इससे किसानों व व्यापारियों को लागत के अनुसार मुनाफा नहीं मिल रहा है.
ये भी है वजन कम होने का वजह
लीची के आकार व गुणवत्ता में आयी कमी की मूल वजह मिट्टी में क्षारीय तत्व (पीएच) का मानक से अधिक होना और पोषक तत्व की लगातार हो रही कमी है. बेहतर फल के लिए पीएच की मात्रा सामान्य तौर पर सात होनी चाहिए. लेकिन कांटी व इसके आसपास के इलाके के बाग की जांच में पीएच आठ या इससे अधिक पाया गया है. वहीं मिट्टी में नाइट्रोजन, पोटाश, फॉस्फेट, कार्बन, सल्फर, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व कम हुए हैं.
लीची के नैहर में भी नहीं मिल रहा शाही का मिठास
लीची उत्पादन के लिए मुजफ्फरपुर का देश ही नहीं, विदेशों में भी नाम है. कांटी, मुशहरी व मीनापुर को लीची का नैहर कहा जाता है, जहां इसकी पैदावार सबसे अधिक होती है. इस इलाके के किसान मानते हैं कि अब पहले वाली बात नहीं है. लीची के वजन व स्वाद में कमी आयी है. कांटी के सहबाजपुर के किसानश्री से सम्मानित मुरलीधर शर्मा कहते हैं कि 12-15 साल पहले हमारे बाग की लीची 40 ग्राम की हुआ करती थी. लेकिन अब हालात बदल गये हैं. अब 20-25 ग्राम की लीची को एक्सपोर्ट क्वालिटी माना जाता है. एमवीआरआइ भटाैलिया के निदेशक अविनाश कुमार कहना है कि लीची के वजन व गुणवत्ता कमी आयी है. वजह माैसम व बगीचे में अधिक केमिकल का उपयोग है. लीची की पैदावार व्यावसायिक तौर पर होती है. जमीन को वे सप्लीमेंट भी मिलने चाहिए, जो लीची उत्पादन के लिए जरूरी हैं.
चार को राष्ट्रपति भवन पहुंचेगी शाही लीची
मुजफ्फरपुर. मुजफ्फरपुर की शाही लीची राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री भवन चार जून को पहुंचेगी. जिला प्रशासन इसे अंतिम रूप देने में जुटा है. लीची भेजने के लिए पताही के राधाकृष्ण केडिया के बगीचा को चिह्नित किया गया है. यहीं की लीची को राष्ट्रपति व पीएम चखेंगे. सहायक उद्यान पदाधिकारी राधेश्याम ने बताया कि 2 जून की देर रात या 3 जून की सुबह लीची भेजी जायेगी. ट्रेन या फ्लाइट से लीची की खेप भेजी जायेगी. एक-दो दिन में लीची भेजने से संबंधित सभी बातों पर निर्णय हो जायेगा. दो-दो किलो के एक हजार पैकेट लीची राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री भवन भेजी जायेगी. लीची भेजने से पहले डीएम की ओर से गठित टीम लीची की जांच करेगी.
लीची के नैहर में भी नहीं मिल रहा शाही का मिठास
लीची उत्पादन के लिए मुजफ्फरपुर का देश ही नहीं, विदेशों में भी नाम है. कांटी, मुशहरी व मीनापुर को लीची का नैहर कहा जाता है, जहां इसकी पैदावार सबसे अधिक होती है. इस इलाके के किसान मानते हैं कि अब पहले वाली बात नहीं है. लीची के वजन व स्वाद में कमी आयी है. कांटी के सहबाजपुर के किसानश्री से सम्मानित मुरलीधर शर्मा कहते हैं कि 12-15 साल पहले हमारे बाग की लीची 40 ग्राम की हुआ करती थी.
लेकिन अब हालात बदल गये हैं. अब 20-25 ग्राम की लीची को एक्सपोर्ट क्वालिटी माना जाता है. एमवीआरआइ भटाैलिया के निदेशक अविनाश कुमार कहना है कि लीची के वजन व गुणवत्ता कमी आयी है. वजह माैसम व बगीचे में अधिक केमिकल का उपयोग है. लीची की पैदावार व्यावसायिक तौर पर होती है. जमीन को वे सप्लीमेंट भी मिलने चाहिए, जो लीची उत्पादन के लिए जरूरी हैं.
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