लचर ट्रैफिक से शहर में जाम ही जाम

Updated at :06 May 2017 5:52 AM
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लचर ट्रैफिक से शहर में जाम ही जाम

मुंगेर : लचर ट्रैफिक व्यवस्था के कारण शहर में जाम ही जाम की स्थिति है. शायद ही कोई ऐसा मार्ग हो जहां लोगों को जाम की समस्या से जूझाना न पड़ता हो. जाम के कारण एक ओर जहां आम राहगीरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं दूसरी ओर स्कूली बच्चे व […]

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मुंगेर : लचर ट्रैफिक व्यवस्था के कारण शहर में जाम ही जाम की स्थिति है. शायद ही कोई ऐसा मार्ग हो जहां लोगों को जाम की समस्या से जूझाना न पड़ता हो. जाम के कारण एक ओर जहां आम राहगीरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं दूसरी ओर स्कूली बच्चे व मरीज लेकर आने वाले वाहनों को भी जमा से भारी परेशानी हो रही.

यहां लगता है जाम
शहर में दर्जन भर ऐसे स्थान हैं जहां जाम लगता है. पूरबससराय अंडर ब्रिज एवं मुंगेर रेलवे स्टेशन बनने के बाद स्टेशन चौक से दिलीप धर्मशाला चौक पर जाम की स्थिति बनी रहती है. नीलम सिनेमा चौक से कोतवाली चौक, बेकापुर जुबली बेल पथ, गुलजार पोखर, बड़ी बाजार, कस्तूरबा चौक एवं कौड़ा मैदान में हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है. जबकि एक नंबर ट्रैफिक से लेकर कोतवाली चौक से सीताकुंड स्टैंड तक भी जाम की स्थिति बनी रहती है. जाम की स्थिति कभी-कभी इतना विकराल हो जाता है कि पैदल भी पार करना मुश्किल होता है.
रोगियों को झेलनी पड़ती है परेशानी : कोतवाली चौक हो कर ही रोगी सदर अस्पताल पहुंचते है. लेकिन कोतवाली चौक से जिला स्कूल तक हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है. जिला स्कूल मैदान में खोला गया सब्जी मंडी एवं अस्पताल रोड में अवैध रूप से खुले गैराज के कारण हमेशा इस मार्ग में जाम की स्थिति बनी रहती है. जिसके कारण रोगियों को अस्पताल पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
ट्रैफिक पुलिस रहने के बावजूद लगता है जाम : यातायात व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए जगह-जगह ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था की गयी है. पूरबसराय रेलवे अंडर ब्रिज, एक नंबर ट्रैफिक एवं कौड़ा मैदान में पुलिस के रहते हुए भी हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है. जो ट्रैफिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है.
लाइलाज बना जाम : शहर में अतिक्रमण और आड़े तिरछे खड़े वाहनों से जाम की समस्या लाइलाज बीमारी बन चुकी है. शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जिस दिन लोगों को जाम की समस्या से जूझना न पड़ता हो. जिला प्रशासन, निगम प्रशासन भी इस दिशा में कोई खास कार्रवाई नहीं कर पा रही है. यह अब लाइलाज मर्ज बनता जा रहा है.
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