राम के बिना राज क्या : शंभु शरण महाराज
राम के बिना राज क्या : शंभु शरण महाराज फोटो संख्या : 5फोटो कैप्सन : प्रवचन करते शंभु शरण महाराज प्रतिनिधि, संग्रामपुर केकई वीरांगना थी जो कर्तव्य उसने निभाया वह शायद ही कोई मां निभा सकती है. ये बातें श्रीश्री 108 मां दुर्गा मंदिर संस्थान नवगांई के प्रशाल में भागवत कथा के दौरान वृंदावन से […]
राम के बिना राज क्या : शंभु शरण महाराज फोटो संख्या : 5फोटो कैप्सन : प्रवचन करते शंभु शरण महाराज प्रतिनिधि, संग्रामपुर केकई वीरांगना थी जो कर्तव्य उसने निभाया वह शायद ही कोई मां निभा सकती है. ये बातें श्रीश्री 108 मां दुर्गा मंदिर संस्थान नवगांई के प्रशाल में भागवत कथा के दौरान वृंदावन से आये शंभु शरण जी महाराज ने कही. गीत-संगीत एवं भजनों के बीच कथा सुनाते हुए उन्होंने केकई, दशरथ, उर्मिला, राम-सीता, लक्ष्मण एवं भरत के चरित्र को इस कदर दर्शाया कि श्रोता भक्ति सागर में सराबोर हो गये. उन्होंने कहा कि राजा दशरथ के घर प्रभु का जन्म लेना एवं पुत्र वियोग में उनकी मृत्यु होना पूर्व के वरदान एवं श्राप का परिणाम था. वह तो होना ही था. परंतु माता केकई ने जो किया वह वास्तव में एक कठिन कार्य था. प्रभु जानते थे यह कार्य कोई वीरांगना मां ही कर सकती है. प्रभु ने धरती पर दानवों के बढ़ते अत्याचार के लिए राज का त्याग कर वनगमन के लिए माता केकई के उस वरदान को आधार बनाया जो महाराज दशरथ ने दिये थे. पिता के वचन को निभाने प्रभु वन गमन को तैयार होकर अपनी पत्नी सीता के पास गये. सीता ने कहा कि वे अकेले वन नहीं जा सकते. उसके माता-पिता ने उसे जो शिक्षा दी है उसके लिए पति के हर सुख दुख में उसे साथ रहना है. वरना वह शरीर का त्याग कर देगी. उसी क्रम में वहां भाई लक्ष्मण आये. लक्ष्मण से जब राम ने कहा कि भाई पिता का वचन निभाने वे तो वन जा रहे हैं तो लखन ने कहा कि राम के बिना राज क्या. राम ने कहा कि तुम तो ब्रह्मांड को उठाने का बड़बोलापन करते थे. आज राज चलाने की बात आयी तो डर गये. लखन जी बोले भैया मेरी शक्ति तो आपसे है. आप नहीं तो कुछ भी नहीं. तीनों वन गये, पिता दशरथ ने शरीर का त्याग कर दिया. भरत जी जब सूचना पाकर गये तो पूरी बात जान कर उन्होंने जो किया वह भरत के सिवा और कोई भाई नहीं कर सकता था. कथा के दौरान श्रोता भक्तों की भारी भीड़ लगी रही.
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