शहर के पीएचसी से बगैर इलाज लौटे मरीज
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Dec 2017 4:39 AM (IST)
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हड़ताल. संविदा स्वास्थ्यकर्मियों का आंदोलन तेज, स्वास्थ्य व्यवस्था ठप करने की तैयारी स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव का आज होगा पुतला दहन कल ठप किया जायेगा अस्पताल का ओपीडी मुंगेर : सेवा नियमितीकरण एवं समान काम के समान वेतन के मुद्दे पर आंदोलित संविदा स्वास्थ्यकर्मी अब आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं. एक ओर […]
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हड़ताल. संविदा स्वास्थ्यकर्मियों का आंदोलन तेज, स्वास्थ्य व्यवस्था ठप करने की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव का आज होगा पुतला दहन
कल ठप किया जायेगा अस्पताल का ओपीडी
मुंगेर : सेवा नियमितीकरण एवं समान काम के समान वेतन के मुद्दे पर आंदोलित संविदा स्वास्थ्यकर्मी अब आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं. एक ओर जहां स्वास्थ्य संविदाकर्मी संघ ने अपने आंदोलन को तेज करते हुए शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव का पुतला दहन करने का निर्णय लिया है. वहीं शनिवार को मुंगेर मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल के ओपीडी सेवा को ठप किया जायेगा. इधर राज्य सरकार ने संविदा स्वास्थ्यकर्मियों के हड़ताल को अवैधानिक करार देते हुए उसके विरुद्ध कार्रवाई का ऐलान किया है. इसके तहत नो वर्क नो पेय के सिद्धांत को लागू करते हुए संविदा के शर्तों का उल्लंघन करने वाले कर्मियों की संविदा समाप्त करने की घोषणा की गयी है.
संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की लड़ाई अब आमने-सामने की हो गयी है. राज्य सरकार उसके आंदोलन को पूरी तरह गलत करार दे रही और उसके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी है. वहीं दूसरी ओर गुरुवार को संविदा स्वास्थ्यकर्मियों का हड़ताल चौथे दिन भी जारी रहा. संविदा कर्मी सदर अस्पताल सहित विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में धरना व प्रदर्शन के माध्यम से अपने आंदोलन को तेज कर रहे. सदर अस्पताल में प्रदर्शन कर रहे अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ गोपगुट के सचिव सतीश प्रसाद व बिहार चिकित्सा जनस्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अफजल हुसैन ने कहा कि पूरे बिहार के संविदाकर्मी आज एक ही बैनर के नीचे एक साथ आंदोलन कर रहे हैं. सरकार के डराने या धमकाने से इस आंदोलन पर कोई असर नहीं पड़ने वाला, यदि सरकार द्वारा अपनी तानाशाही नीति को समाप्त नहीं किया जाता है तो आंदोलन को और भी उग्र किया जाएगा़ इसकी रणनीति बनायी जा रही है. शुक्रवार को जहां स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव का पुतला दहन किया जायेगा, वहीं शनिवार को सदर अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर ओपीडी सेवा को बाधित किया जायेगा. यदि जरूरत पड़ी तो संविदाकर्मी आत्मदाह को भी तैयार है.
शहरी पीएचसी में नहीं हो रहा इलाज :
स्वास्थ्य संविदा कर्मियों के हड़ताल से न सिर्फ विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने वाले मरीजों को लाइलाज ही लौटना पड़ रहा है, बल्कि सदर अस्पताल में भी मरीजों को खासे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है़ शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों पर अब तक चिकित्सकों की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों को बिना इलाज कराये ही वापस घर लौटना पड़ रहा है़ गुरुवार को जहां माधोपुर स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लगा था. वहीं लाल दरवाजा शहरी पीएचसी में मात्र एक डाटा ऑपरेटर मौजूद था. यहां आयुष चिकित्सक डॉ सुमन प्रसाद साह प्रतिनियुक्त हैं. लेकिन वे हड़ताल पर हैं. किंतु केंद्र पर जीएनएम भी ड्यूटी पर मौजूद नहीं थी. जबकि अधिकारिक तौर पर जीएनएम हड़ताल में शामिल नहीं है.
बिना इलाज के ही लौटे रोगी : लाल दरवाजा स्थित शहरी पीएचसी में दोपहर 2 नंबर गुमटी निवासी उषा देवी इलाज कराने पहुंची. वह पिछले दो दिनों से बुखार व खांसी से परेशान है. उषा जब लाल दरवाजा पहुंची तो पीएचसी को डाटा ऑपरेटर अंदर से बंद रखा था. जहां उपस्थित डाटा ऑपरेटर ने बताया कि चिकित्सक चार दिनों से हड़ताल पर हैं. जीएनएनएम भी अबतक नहीं आयी है. वहीं अभिषेक कुमार अपना घाव दिखाने यहां पहुंचा था. लेकिन चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी के नहीं रहने से उसका इलाज नहीं हो पाया. जबकि स्थानीय अशोक केसरी, जयराम, मनोहर साह, रीना कुमारी, गौरी देवी, सुनीता देवी, सुशीला देवी, बेबी चौरसिया ने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से इलाज कराने आ रहे हैं. लेकिन चिकित्सक नहीं रहने के कारण बिना इलाज कराये ही लौट रहे हैं. यहां किसी तरह का नोटिस बोर्ड भी नहीं लगाया गया है. वहीं सदर अस्पताल में सिर्फ एक ही वैकल्पिक पंजीयन काउंटर की वयवस्था रहने के कारण मरीजों को घंटों लंबी लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है़ हाल यह है कि प्रतिदिन दर्जनों मरीज को पंजीयन करवाने में काफी विलंब हो जाने के कारण तब तक आउटडोर सेवा बंद हो जाने से बिना इलाज कराये ही मरीजों को लौटना पड़ रहा है़
स्वास्थ्य योजनाएं हो रही प्रभावित: स्वास्थ्य संविदा कर्मियों के हड़ताल से केंद्र व राज्य संचालित विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही है़ मालूम हो कि इस हड़ताल में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों के अलावे आशा, ममता, प्रतिरक्षण करियर सहित अन्य कर्मी भी शामिल हैं. जिससे योजनाओं के लेखा संबंधी कार्य प्रभावित होने के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं के प्रतिरक्षण व पोषण कार्य भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं. इतना ही नहीं इस हड़ताल का सबसे अधिक असर तो पुरुष नशबंदी पर पड़ा है़
चेहरा छिपा रहे स्वास्थ्य प्रबंधक: एक ओर जहां स्वास्थ्य संविदा कर्मी अपनी मांगों को लेकर पिछले चार दिनों से हड़ताल पर डटे हुए हैं. वहीं कुछ स्वास्थ्य प्रबंधक अपना चेहरा छिपाने में लगे हुए हैं. हाल यह है कि वे हड़तालियों के साथ बैठने से भी दूर भाग रहे, ताकि उसकी तस्वीर कहीं अखबार में ने छप जाये़ ऐसे स्वास्थ्य प्रबंधक बड़े ही चालाकी से स्वास्थ्य विभाग के नजर में कार्यरत बने हुए हैं तथा दूसरी ओर हड़तालियों को भी ढ़ांढ़स बधा रहे हैं. जिसको लेकर हड़तालियों में भी काफी क्षोभ है़
प्रदर्शन में थे शामिल : स्वास्थ्य संविदा कर्मी संघ के अध्यक्ष आमिर हसन खान, सचिव विकास कुमार, उप सचिव निखिल राज, शैलेन्दु कुमार, उपाध्यक्ष उमेश कुमार, राजेश कुमार, सत्येन्द्र कुमार, मनीष कुमार प्रणय, राहुल कुमार, मो. आफाक, विश्वरंजन कुमार, रवि कुमार, केशव कुमार, संयोजक शिव प्रकाश केशरी, मीडिया प्रभारी अभिषेक कुमार सोनी, सभी आषा कर्मी, अमसा के सचिव डा. पंकज कुमार, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के सभी चिकित्सक, एएनएम, फर्माशिष्ट, जिले के सभी आयुष चिकित्सक सहित सभी संविदाकर्मी मौजूद थे.
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