मोतिहारी: घोड़ासहन के जेएलएनएम डिग्री कॉलेज में शिक्षकों की भारी कमी, 6500 छात्रों की पढ़ाई ठप

जेएलएनएम कॉलेज घोड़ासहन | Prabhat Khabar Network
मोतिहारी जिले के घोड़ासहन में स्थित जेएलएनएम डिग्री कॉलेज शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है. प्राचार्य समेत केवल दो स्थायी प्राध्यापकों के सहारे 6500 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. विश्वविद्यालय प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप है, जिससे छात्रों में भारी रोष है.
Degree College: मोतिहारी जिले में भारत-नेपाल सीमा से सटे घोड़ासहन प्रखंड के एकमात्र अंगीभूत जेएलएनएम डिग्री कॉलेज में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है. इसके चलते करीब 6500 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है. 13 संकायों वाले इस कॉलेज में प्राचार्य समेत केवल दो स्थायी प्राध्यापक कार्यरत हैं, जबकि सात गेस्ट (अतिथि) सहायक प्राध्यापकों के भरोसे पूरी शैक्षणिक व्यवस्था चलाई जा रही है. विश्वविद्यालय और यूजीसी के मानकों के अनुसार प्रति 40 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना अनिवार्य है, लेकिन यहां यह अनुपात कई गुना अधिक हो चुका है.
गणित, भौतिकी और राजनीति शास्त्र में एक भी शिक्षक नहीं
विज्ञान संकाय में स्वीकृत 10 पदों के मुकाबले महज तीन गेस्ट शिक्षक कार्यरत हैं. जूलॉजी, बॉटनी और केमिस्ट्री में एक-एक गेस्ट शिक्षक हैं, जबकि गणित और भौतिकी जैसे महत्वपूर्ण विषयों में वर्षों से कोई शिक्षक तैनात नहीं है. यही वजह है कि प्रयोगशालाएं उपलब्ध होने के बावजूद प्रायोगिक कक्षाएं नहीं हो पाती हैं. इसी तरह कला संकाय के 17 स्वीकृत पदों के विरुद्ध केवल पांच गेस्ट शिक्षक तैनात हैं. राजनीति शास्त्र और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों में शिक्षक न होने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है.
छात्रों में रोष, विश्वविद्यालय प्रशासन पर उपेक्षा के आरोप
छात्रों का कहना है कि दो-तीन विषयों को छोड़कर बाकी विषयों की नियमित कक्षाएं नहीं चलती हैं, जिससे उन्हें निजी कोचिंग पर अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं. स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सीमावर्ती और ग्रामीण क्षेत्र का प्रमुख कॉलेज होने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन इसकी लगातार उपेक्षा कर रहा है. कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रो. रवि कुमार ने बताया कि सीमित संसाधनों के बाद भी कॉलेज के विद्यार्थी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. शिक्षकों की कमी को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को कई बार पत्र भेजा जा चुका है और जल्द सुधार की उम्मीद है.
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