भारतीय खाद से नेपाल के खेतों में हरियाली, तस्करी से सीमावर्ती इलाकों के किसान बेहाल

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खेत में खाद छीटते किसान, फोटो- सांकेतिक, AI जेनरेटेड

घोड़ासहन में भारतीय खाद की नेपाल तस्करी का मामला गरमाया है. सीमावर्ती किसानों को आशंका है कि इससे स्थानीय स्तर पर खाद की कमी हो सकती है, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होगा. उन्होंने पुलिस, कृषि विभाग और SSB के बीच बेहतर समन्वय की मांग की है.

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मोतिहारी फर्टिलाइजर तस्करी: घोड़ासहन में भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में भारतीय उर्वरक की कथित अवैध आवाजाही का मामला चर्चा में है. स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि सरकारी दर पर उपलब्ध कराई जाने वाली भारतीय खाद के नेपाल पहुंचने की शिकायतें सामने आती रही हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि उर्वरक अवैध तरीके से सीमा पार पहुंच रही है तो इसका असर सीमावर्ती इलाकों के भारतीय किसानों पर पड़ सकता है.

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हालांकि, प्रखंड कृषि पदाधिकारी शिलानाथ झा ने उर्वरक की कमी से इनकार किया है. उन्होंने बताया कि घोड़ासहन प्रखंड में उर्वरक की कोई कमी नहीं है और स्थिति नियंत्रण में है.

किसानों तक सही रेट पर पहुंचाने की मांग

किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से खेती के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले उर्वरक का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों की जरूरतों को पूरा करना है. खेती के महत्वपूर्ण समय में खाद की पर्याप्त उपलब्धता किसानों के लिए बेहद जरूरी है.

किसानों को आशंका है कि यदि उर्वरक की अवैध तरीके से सीमा पार आवाजाही होती है तो स्थानीय स्तर पर आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. इसका सीधा असर फसलों की खेती और उत्पादन पर पड़ने की संभावना है. सीमावर्ती क्षेत्रों में खाद की उपलब्धता को लेकर निगरानी और वितरण व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई है.

पुलिस, कृषि विभाग और SSB के समन्वय पर जोर

स्थानीय लोगों का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा पर उर्वरक की कथित अवैध आवाजाही रोकने के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है. किसानों ने पुलिस, कृषि विभाग, स्थानीय प्रशासन और SSB के बीच समन्वय बढ़ाने की मांग की है.

उनका कहना है कि सीमा से जुड़े संवेदनशील और वैकल्पिक रास्तों पर विशेष निगरानी की जानी चाहिए. जरूरत पड़ने पर उर्वरक की ढुलाई और वितरण व्यवस्था की भी नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि सरकारी व्यवस्था का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंच सके.

तस्करी पर कार्रवाई की मांग

किसानों ने प्रशासन से खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ कथित तस्करी या अवैध आवाजाही पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए.

वहीं, प्रखंड कृषि पदाधिकारी शिलानाथ झा ने स्पष्ट किया कि घोड़ासहन प्रखंड में उर्वरक की कोई कमी नहीं है और उपलब्धता पर नजर रखी जा रही है. प्रशासनिक स्तर पर स्थिति को नियंत्रण में रखने का प्रयास किया जा रहा है.

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