मधुबनी: करोड़ों की प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट योजना दम तोड़ रही, पांच में सिर्फ दो यूनिट चालू

Updated:
विज्ञापन
बंद पड़ा प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट  सड़क किनारे डंप कचरा | Prabhat Khabar Network

बंद पड़ा प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट | Prabhat Khabar Network

मधुबनी में प्लास्टिक कचरे के निस्तारण की व्यवस्था चरमरा गई है. करोड़ों की लागत से बनी 5 वेस्ट मैनेजमेंट यूनिटों में से सिर्फ 2 ही काम कर रही हैं, जिससे शहर में प्लास्टिक कचरे का अंबार लग रहा है. यह स्थिति पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है.

विज्ञापन

Madhubani News: प्लास्टिक कचरे के निस्तारण और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से जिले में स्थापित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिटों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित पांच यूनिटों में से फिलहाल केवल दो ही संचालित हो रही हैं, जबकि तीन यूनिट लंबे समय से बंद पड़ी हैं. इसके कारण सड़कों, नालों और सार्वजनिक स्थानों पर प्लास्टिक कचरे का अंबार लग रहा है, जिससे स्वच्छता अभियान के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं.

पांच में सिर्फ दो यूनिट चालू

जानकारी के अनुसार जिले के पंडौल प्रखंड के सकरी और रहिका प्रखंड के जगतपुर स्थित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट ही वर्तमान में संचालित हैं. वहीं बिस्फी, झंझारपुर और जयनगर की यूनिटें लंबे समय से बंद हैं. रखरखाव और संचालन के अभाव में करोड़ों रुपये की परियोजना का अपेक्षित लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है.

2.63 लाख घरों के कचरे के लिए सिर्फ 14 मशीनें

जिले के करीब 2.63 लाख घरों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए पांच यूनिटों में कुल 14 मशीनें उपलब्ध हैं. सरकारी रिकॉर्ड में व्यवस्था को मजबूत बताया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर तीन यूनिट बंद रहने से प्लास्टिक कचरा खुले स्थानों, सड़कों और नालों में जमा हो रहा है.

244 गांवों पर पांच यूनिट का जिम्मा

रिपोर्ट के अनुसार पंडौल, रहिका, बिस्फी, झंझारपुर और जयनगर प्रखंड की 114 पंचायतों और 244 गांवों के प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन की जिम्मेदारी इन्हीं पांच यूनिटों पर है. इनसे करीब 2,63,230 घर जुड़े हुए हैं. औसतन एक यूनिट पर लगभग 17 गांव और 18,800 घरों का कचरा निर्भर है.

बिस्फी क्षेत्र में 45 गांवों के लिए सीमित क्षमता की व्यवस्था है, जबकि जयनगर क्षेत्र में भी उपलब्ध संसाधन जरूरत के अनुरूप नहीं हैं. इसका असर यह है कि प्लास्टिक कचरा खेतों, नालों और सड़कों पर फेंका जा रहा है.

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर बढ़ रहा खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि 244 गांवों की जरूरत के हिसाब से जिले में कम से कम 50 प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट होनी चाहिए. वर्तमान में उपलब्ध 14 मशीनों से न तो कचरे का समुचित संग्रह हो पा रहा है और न ही उसका प्रभावी पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग). इससे मवेशियों द्वारा प्लास्टिक खाने, जल निकासी बाधित होने और भूजल प्रदूषण जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं.

लोगों ने प्रत्येक पंचायत में एक प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित करने तथा कचरा संग्रहण वाहनों की संख्या बढ़ाने की मांग की है.

क्या बोले अधिकारी

डीआरडीए के निदेशक सैयद सरफराजुद्दीन अहमद ने बताया कि झंझारपुर यूनिट का छप्पर आंधी में उड़ जाने से उसका संचालन प्रभावित है. बिस्फी यूनिट को अब तक बिजली कनेक्शन नहीं मिल सका है, जबकि जयनगर यूनिट के संचालन को लेकर जीविका परियोजना से बातचीत चल रही है.

उन्होंने कहा कि पंडौल और रहिका की यूनिटें नियमित रूप से संचालित हो रही हैं तथा बंद पड़ी अन्य तीन यूनिटों को भी शीघ्र चालू कराने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है.


विज्ञापन
Awadesh Kumar Das

लेखक के बारे में

By Awadesh Kumar Das

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन