मधुबनी में शोपीस बनीं प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिटें: 5 में से 3 यूनिट ठप, सड़कों पर पसरा कचरा

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बंद पड़ा प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट सड़क किनारे डंप कचरा | Prabhat Khabar Network

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मधुबनी जिले में प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से कोसों दूर है. जिले की पांचों प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिटों में से केवल दो ही चालू हैं, जबकि तीन अन्य लंबे समय से बंद पड़ी हैं. इससे गांवों और सड़कों पर प्लास्टिक कचरा जमा हो रहा है.

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Waste Management Madhubani: जिले में प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए लाखों-करोड़ों की लागत से स्थापित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिटों की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से काफी अलग है. जिले की पांच यूनिटों में से सिर्फ दो (पंडौल के सकरी और रहिका के जगतपुर) ही चालू हैं. बाकी तीन यूनिटें लंबे समय से ताले में बंद हैं.

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2.63 लाख घरों पर सिर्फ 14 मशीनें

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले के 5 प्रखंडों (पंडौल, रहिका, बिस्फी, झंझारपुर और जयनगर) की 114 पंचायतों तथा 244 गांवों के 2,63,230 घरों का कचरा इन यूनिटों पर निर्भर है. औसतन एक यूनिट पर 17 गांव और करीब 18,800 घरों का प्लास्टिक कचरा आता है. इतने बड़े क्षेत्र के लिए पूरे जिले में महज 14 मशीनें ही उपलब्ध हैं.

जर्जर व्यवस्था से पर्यावरण को खतरा

  • बंद पड़ी यूनिटें: बिस्फी, झंझारपुर और जयनगर की यूनिटें बंद होने से कचरा नालों, सड़कों और खेतों में जमा हो रहा है.
  • मवेशियों व स्वास्थ्य पर असर: मवेशी खुले में प्लास्टिक खा रहे हैं, जिससे भूजल दूषित होने और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.
  • ग्रामीणों की मांग: 244 गांवों की जरूरत के हिसाब से जिले में कम से कम 50 यूनिटें और संग्रह गाड़ियों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए.

बंद पड़ी यूनिटों पर क्या बोले अधिकारी

डीआरडीए निदेशक सैयद सरफराजुद्दीन अहमद ने बताया कि झंझारपुर यूनिट का छप्पर आंधी में उड़ गया था, बिस्फी में बिजली कनेक्शन का इंतजार है और जयनगर यूनिट के संचालन के लिए जीविका से बात चल रही है. उन्होंने जल्द ही सभी बंद यूनिटों को शुरू कराने का आश्वासन दिया है.

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