मधुबनी में मछली की बंपर पैदावार, 50 हजार लोगों को मिला रोजगार

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तालाब में फिश प्रोडक्शन

मधुबनी में मछली उत्पादन बढ़ने के साथ जिले की पहचान नीली क्रांति के मॉडल के रूप में बन रही है. स्थानीय जरूरत पूरी करने के बाद यहां की मछली अब झारखंड, नेपाल और पड़ोसी जिलों तक पहुंच रही है.

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मधुबनी मछली उत्पादन के क्षेत्र में मधुबनी ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और किसानों की मेहनत के दम पर जिला बिहार में मछली उत्पादन के मामले में पहले स्थान पर पहुंच गया है. यहां खपत से अधिक मछली का उत्पादन हो रहा है, जिसके बाद मधुबनी से झारखंड, नेपाल और पड़ोसी जिलों में 15.075 हजार मीट्रिक टन मछली निर्यात की जा रही है. खास बात यह है कि अब जिले की आंध्र प्रदेश से आने वाली मछली पर निर्भरता भी काफी कम हो गई है.

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जिले में करीब 11 हजार तालाब

मधुबनी में सरकारी और निजी मिलाकर करीब 11 हजार तालाब हैं. इन तालाबों और अन्य जलस्रोतों का बेहतर उपयोग कर मत्स्यपालक उत्पादन बढ़ा रहे हैं. मछली पालन अब सिर्फ पारंपरिक व्यवसाय नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बन चुका है.

जिले में करीब 50 हजार लोग मछली पालन और इससे जुड़े व्यवसाय से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं. मछली उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी श्रृंखला में लोगों को रोजगार मिल रहा है. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है.

खपत से ज्यादा हो रहा उत्पादन

मधुबनी में सालाना मछली उत्पादन बढ़ने के साथ अब जिले की जरूरत भी स्थानीय स्तर पर पूरी हो रही है. आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 90 हजार मीट्रिक टन मछली की खपत है, जबकि उत्पादन इससे अधिक हो रहा है. इसके कारण झारखंड, नेपाल और आसपास के जिलों में मछली की आपूर्ति की जा रही है.

वर्ष 2024-25 में जिले में 106 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ था. वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 130.50 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया. वर्ष 2026-27 के लिए 132.67 हजार मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. जुलाई तक 44.12 हजार मीट्रिक टन मछली उत्पादन हो चुका है. जिले में रोहू और कतला मछली के पालन को विशेष तौर पर बढ़ावा दिया जा रहा है.

किसानों को मिल रहा 40 से 70 फीसदी तक अनुदान

मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य विभाग किसानों को 40 से 70 फीसदी तक अनुदान दे रहा है. तालाब निर्माण, हैचरी, फिश फीड मिल, उन्नत बीज, ट्यूबवेल, पंप सेट और एरेटर जैसी सुविधाओं पर योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है. निजी तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए भी सहायता उपलब्ध है.

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना और मुख्यमंत्री तालाब मत्स्यिकी विकास योजना के जरिए किसानों को मछली पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

नई तकनीक से आत्मनिर्भर बन रहे किसान

जिला मत्स्य पदाधिकारी अंजनी कुमार ने कहा कि मधुबनी के मछली पालक किसान प्रशिक्षण लेकर नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसका असर उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी के रूप में दिख रहा है. उन्होंने कहा कि आधुनिक तरीके से मत्स्य पालन कर किसान न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि जिले को मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर भी बना रहे हैं.

मधुबनी की यह सफलता बिहार में नीली क्रांति की मजबूत तस्वीर पेश कर रही है. बढ़ते उत्पादन के साथ जिले के किसान अब स्थानीय बाजार की जरूरत पूरी करने के बाद दूसरे राज्यों और नेपाल तक मछली पहुंचा रहे हैं.

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