रोज शहर आते काम की तलाश में, खाली हाथ लौट जाते

मधुबनी : सुबह के करीब आठ बज रहे थे. हम टहलते हुए तेरह नंबर गुमटी के पास पहुंचे. इस समय ग्रामीण क्षेत्रों के किसान हरी ताजी सब्जी लेकर इसी होकर निकलते हैं. सोचा था ताजी सब्जी खरीदेंगे. पर हम जैसे ही हम गुमटी के करीब पहुंचे, अचानक ही वहां के करीब दस लोग हमारे पास […]
मधुबनी : सुबह के करीब आठ बज रहे थे. हम टहलते हुए तेरह नंबर गुमटी के पास पहुंचे. इस समय ग्रामीण क्षेत्रों के किसान हरी ताजी सब्जी लेकर इसी होकर निकलते हैं. सोचा था ताजी सब्जी खरीदेंगे. पर हम जैसे ही हम गुमटी के करीब पहुंचे, अचानक ही वहां के करीब दस लोग हमारे पास आ गये. सब मजदूर व राज मिस्त्री थे.
किसी के हाथ में कुदाल तो किसी के हाथ में करनी – बसुली (जोड़ाई करने वाला सामान ) था. हमे देखते ही वह सभी अचानक ही कहने लगा ”मालिक की काज छी, घर जोड़ाई करेबा के छी,आ की आउर कुनो काज चलू ने हम सब क दई छी. अहां हमरा सब से मात्र तीन सौ रुपैया की दर स मजदूरी द देब. राज मिस्त्री के चाइर सौ. हर सब घड़ी देख का पूरा पूरा आठ घंटा काज क देब. ” हम अचंभित. यही वह जगह है जहां पर हम कुछ दिन पूर्व अपने घर में कुछ काम से राज मिस्त्री और मजदूर को खोजने आये थे तो सभी मुंह घुमा कर निकल गये थे. एक दूसरे पर काम को थोंप कर फेंक रहा था. जैसे कोई बगैर मजदूरी के उन्हें काम को बोला हो.
मजदूर पांच सौ रुपये मांग रहा था तो राज 700 से आठ सौ तक. पर आज तो माहौल ठीक उल्टा था. जानकारी के अनुसार हर दिन यहां जिले भर के करीब दो सौ से अधिक मजदूर व राज मिस्त्री काम के तलाश में आते हैं. जिन्हें लोग काम मुहैया कराते हैं.
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