बीमा क्लेम खारिज करना एसबीआइ को पड़ा महंगा

Published at :19 Oct 2017 12:30 PM (IST)
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बीमा क्लेम खारिज करना एसबीआइ को पड़ा महंगा

मधुबनी : एसबीआइ लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा गलत व मनगढंत झूठे तथ्य के आधार पर बीमा क्लेम खारिज करना महंगा पड़ा. उक्त मामले से संबंधित मामलों का सुनवाई करतेहुए उपभोक्ता न्यायालय के अध्यक्ष विनोदानंद झा विनीत व सदस्य रंजना झा एवं लक्ष्मण कुमार की पीठ ने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस को आवेदिका कोविमित राशी दस […]

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मधुबनी : एसबीआइ लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा गलत व मनगढंत झूठे तथ्य के आधार पर बीमा क्लेम खारिज करना महंगा पड़ा. उक्त मामले से संबंधित मामलों का सुनवाई करतेहुए उपभोक्ता न्यायालय के अध्यक्ष विनोदानंद झा विनीत व सदस्य रंजना झा एवं लक्ष्मण कुमार की पीठ ने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस को आवेदिका कोविमित राशी दस लाख रुपये एक दिसंबर 2014 से 6 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश जारी किया है. साथ ही मानसिक प्रताड़ना हेतु तीन हजार व वाद खर्च दो हजार देने का आदेश भी दिया है. तीन महीना के तय समय सीमा के अंदर राशि भुगतान नहीं करने पर आठ प्रतिशत की ब्याज के साथ राशि की वसूल की जाएगी.
क्या है मामला. आवेदिका के अधिवक्ता अमरनाथ झा के अनुसार आवेदिका नगर थाना क्षेत्र के भौआड़ा वार्ड नंबर 23निवासी रोजीना खातुन के पति मो. नसरूलाह एसबीआई एडीबी शाखा से चार लाख रुपये आवासीय ऋण लिया था. इसी दौरान उक्त शाखा एसबीआई लाइफ ऋण रक्षा प्लान गारंटी के तहत 29 नवंबर 2014 को बीमा करवाया था.
उक्त बीमा की प्रथम किस्त 13 हजार 992 रुपये जमा किया था.संयोगवश एक दिसंबर 2014 को मो. नसरूलाह का देहांत हो गया था. मो. नसरूलाह की पत्नी आवेदिका रोजीना खातुन ने उक्त लाइफ इंश्योरेंस को क्लेम दाखिल किया था. लेकिन, कंपनी के जांचकर्ता द्वारा जाली चिकित्सा प्रमाण पत्र बनावकर क्लेम आवेदन को खारिज कर दिया.
आवेदिका द्वारा इसकी सूचना आवेदन के माध्यम से एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को मुंबई सहित पटना कार्यालय को दी. लेकिन, उक्त कंपनी से कोई जवाब नहीं मिला. साथ ही बीमा के क्लेम को गलत व झूठे तथ्य के आधार पर खारिज कर दिया. इससे व्यथित होकरआवेदिका ने उपभोक्ता न्यायालय में वाद संख्या58/2016 दायर किया था.
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