मुरलीगंज में रक्षाबंधन का अलग रंग, ‘राखी’ के हर अक्षर में छिपा बताया जिम्मेदारी और जागरूकता का संदेश
ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय संस्थान द्वारा रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित | Prabhat Khabar Network
मुरलीगंज में मनाया गया रक्षाबंधन महोत्सव, जिसने पर्व के पारंपरिक अर्थ को विस्तार दिया. ब्रह्माकुमारी स्नेहा दीदी ने बताया कि 'RAKHI' के हर अक्षर में छिपा है जिम्मेदारी, जागरूकता, दया, नम्रता और अंतर्मुखता का संदेश. यह कार्यक्रम नारी सुरक्षा और आत्मरक्षा पर भी केंद्रित रहा.
Murliganj Raksha Bandhan Mahotsav: मधेपुरा. रक्षाबंधन को आमतौर पर भाई-बहन के स्नेह और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. लेकिन मुरलीगंज में बुधवार को मनाया गया अलौकिक रक्षाबंधन महोत्सव इस पारंपरिक पर्व से आगे बढ़कर आध्यात्मिक संदेश का माध्यम बना. प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवाकेंद्र में आयोजित कार्यक्रम में राखी को केवल भाई-बहन के रिश्ते से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, जागरूकता, दया और आत्मरक्षा से जोड़कर समझाया गया.
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कार्यक्रम में सहरसा से पहुंची सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी स्नेहा दीदी ने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल भाई-बहन का पर्व नहीं है. यह स्वयं पवित्र बनने और दूसरों को भी पवित्र बनने की प्रेरणा देने वाला पर्व है.
राखी के धागे में छिपा है जिम्मेदारी का संदेश
स्नेहा दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में विषय-विकारों के बढ़ने के कारण नारी शक्ति की सुरक्षा एक चुनौती बन गयी है. ऐसे दौर में परमात्मा पहले आत्मरक्षा की प्रतिज्ञा कराते हैं.
उन्होंने रक्षाबंधन के संदेश को व्यक्ति के भीतर बदलाव से जोड़ते हुए कहा कि सुरक्षा केवल बाहरी स्तर पर नहीं, बल्कि विचारों और व्यवहार की पवित्रता से भी जुड़ी है. उनके संदेश में रक्षाबंधन को आत्मचिंतन और जिम्मेदारी का अवसर बनाने पर जोर रहा.
‘RAKHI’ के हर अक्षर का बताया आध्यात्मिक अर्थ
कार्यक्रम के दौरान ब्रह्माकुमारी स्नेहा दीदी ने ‘राखी’ शब्द को अंग्रेजी के अक्षरों से जोड़ते हुए उसका आध्यात्मिक अर्थ भी समझाया.
उन्होंने बताया कि R का अर्थ Responsibility यानी जिम्मेदारी, A का अर्थ Awareness यानी जागरूकता, K का अर्थ Kindness यानी दया, H का अर्थ Humility यानी नम्रता और I का अर्थ Introvertness यानी अंतर्मुखता है.
इस तरह राखी के एक छोटे से धागे को उन्होंने व्यक्ति के जीवन में जिम्मेदारी और आत्मचिंतन से जोड़कर देखने का संदेश दिया.
तिलक लगाकर बांधी राखी, बांटा प्रसाद
कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक माहौल के बीच श्रद्धालुओं को तिलक लगाया गया और राखी बांधी गयी. इसके बाद प्रसाद का वितरण किया गया.
रक्षाबंधन के पारंपरिक भाव के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए पर्व को एक अलग दृष्टिकोण से समझने का अवसर भी मिला. आयोजन में सुरक्षा, पवित्रता और मानवीय मूल्यों को लेकर दिए गये संदेश को लोगों ने सुना.
नारी सुरक्षा से लेकर आत्मरक्षा तक की बात
कार्यक्रम में नारी शक्ति की सुरक्षा के मुद्दे को भी आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सामने रखा गया. वक्ता ने विषय-विकारों को समाज के लिए चुनौती बताते हुए आत्मरक्षा और आत्मजागरूकता की जरूरत पर जोर दिया.
ऐसे समय में जब रक्षाबंधन केवल एक दिन राखी बांधने तक सीमित न रहकर रिश्तों और सामाजिक जिम्मेदारियों को याद करने का अवसर बन सकता है, कार्यक्रम में इसी व्यापक भावना को सामने रखने का प्रयास किया गया.
Murliganj Raksha Bandhan Mahotsav: बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल
अलौकिक रक्षाबंधन महोत्सव में इंद्रा सुमन, अर्चना करनानी, डॉ. सुबोध, दिनेश मिश्रा, अनिल भूत, प्रताप अग्रवाल, गौतम भाई, विनोद बाफना सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि रक्षाबंधन केवल किसी रिश्ते की रक्षा का संकल्प नहीं, बल्कि अपने विचारों और व्यवहार को बेहतर बनाने, दूसरों के प्रति जिम्मेदारी निभाने और समाज में दया, नम्रता तथा जागरूकता बढ़ाने का भी अवसर है.

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