जाली नोटों ने पसारा पांव, लोग हो रहे हलकान

Published at :14 Feb 2017 6:55 AM (IST)
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जाली नोटों ने पसारा पांव, लोग हो रहे हलकान

मुरलीगंज सहित पूरे जिले में आसानी से मिले रहे हैं एक सौ, पचास व दो हजार रुपये के जाली नोट मुरलीगंज : मुरलीगंज सहित पूरे जिले में एक बार फिर जाली नोटों ने पांव पसार लिया है. लोग परेशान हैं. आये दिन लोग नोटों को लेकर बैंक पहुंच रहे हैं और जब उन्हें बताया जाता […]

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मुरलीगंज सहित पूरे जिले में आसानी से मिले रहे हैं एक सौ, पचास व दो हजार रुपये के जाली नोट

मुरलीगंज : मुरलीगंज सहित पूरे जिले में एक बार फिर जाली नोटों ने पांव पसार लिया है. लोग परेशान हैं. आये दिन लोग नोटों को लेकर बैंक पहुंच रहे हैं और जब उन्हें बताया जाता है कि यह जाली नोट है तो उनके पैर के नीचे से जमीन खिसक जाती है. एक तो नोटबंदी की मार से लोग अब तक नहीं उबर सके हैं. व्यापारियों के पास कैश की कमी होने के कारण उनके व्यवसाय और आम लोग के बड़े काम प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे में कोढ़ में खाज की तरह ये जाली नोट सामने आ रहे हैं. एक सौ, पचास और अब दो हजार के नोट भी जाली मिल रहे हैं. पीड़ित बताते हैं कि एक दिन में दो से तीन बार जाली नोट उनके पास चले आते हैं.
व्यवसायी हैं परेशान . मुरलीगंज नगर के चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष ब्रह्मानंद जयसवाल ने बताया कि 100 और 50 रुपये के जाली नोट से काफी परेशानी हो रही है. इन जाली नोट का फ्लो इतना अधिक है कि एक दिन में तीन से चार बार जाली नोट आ ही जाते हैं. उन्होंने बताया कि रविवार को ही उनके पास दोपहर में दो हजार का एक जाली नोट भुगतान में मिला. समय पर परख लिया गया और उसे लेने से इंकार कर दिया. लेकिन शाम होते-होते 50 रुपये के जाली नोट फिर उनकी हाथों में आ गये. जाली नोट देने वाला ग्राहक आराम से चला गया. बाद में जब पता चलने पर कुछ नहीं किया जा सकता है.
गैस एजेंसी संचालक का हाल बुरा . शहर के त्रिमूर्ति एचपीगैस एजेंसी के प्रोपराइटर संजीव कुमार ने बताया कि सोमवार की सुबह सबेरे एक सौ के जाली नोट थमाकर कोई ग्राहक चला गया. जब बैंक भेजने का समय आया और पैसे का मिलान कर रहे थे उस समय फिर एक सौ के जाली नोट निकल कर सामने आ गये. पिछले दो हफ्ते से जाली नोटों का जबरदस्त फ्लो है. पूरे दिन हॉकर ठेले पर गैस सिलेंडरों के वितरण के दौरान होने वाले भुगतान में कुछ जाली नोट दिये जा रहे हैं. हॉकर जाली नोटों की परख नहीं कर पाते. शाम में वे अपना माथा खुद पीटने लगते हैं कि अब क्या करें. उनकी दिन भर की कमाई पानी में चली जाती है. संजीव ने बताया कि गरीब मजदूरों की कमाई तो नहीं काटी जा सकती इसलिये एजेंसी उन नोटों को ले लेती है. सबसे ज्यादा एक सौ और पचास के जाली नोट मिल रहे हैं.
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