गांववासी कैसे सुनेंगे मन की बात

Published at :23 Sep 2016 5:36 AM (IST)
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गांववासी कैसे सुनेंगे मन की बात

रोष . लोगों ने मार्च कर व दूरदर्शन केंद्र पहुंच टावर खोलने का किया विरोध मधेपुरा के लोगों ने दूरदर्शन के लो पॉवर ट्रांसमिशन टॉवर को हटाने के विरोध में मार्च निकाला. लोगों ने दूरदर्शन केंद्र पहुंच कर मजदूरों को टावर खोलने से रोक दिया. इस प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि यह […]

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रोष . लोगों ने मार्च कर व दूरदर्शन केंद्र पहुंच टावर खोलने का किया विरोध

मधेपुरा के लोगों ने दूरदर्शन के लो पॉवर ट्रांसमिशन टॉवर को हटाने के विरोध में मार्च निकाला. लोगों ने दूरदर्शन केंद्र पहुंच कर मजदूरों को टावर खोलने से रोक दिया. इस प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि यह मधेपुरा की अस्मिता के साथ खिलवाड़ है.
मधेपुरा : दुर्गम और पिछड़े इलाकों की समस्याओं में टेलीविजन प्रसारण देख पाना भी एक समस्या है. दूर दराज के गांव में जहां ट्रांसमिशन की सही सुविधा न होना काफी आम बात है, ऐसे में यदि केंद्र सरकार का सूचना प्रसारण मंत्रालय ऐसे किसी इलाके में ट्रांसमिशन टावर ही हटाने का फैसला कर ले, तो फिर क्या कहा जा सकता है. इन इलाकों की जनता बस कराह कर यही कह रही है कि प्रधानमंत्री जी गांव के लोग कैसे सुन पायेंगे मन की बात. मामला मधेपुरा, सिमरी बख्तियारपुर, खगड़िया और कलना (प. बंगाल) से दूरदर्शन के लो पॉवर ट्रांसमिशन टॉवर को हटाने से जुड़ा हुआ है. गुरुवार को मधेपुरा के लोगों को जब पता चला कि टावर खोला जा रहा है,
तो उद्वेलित होकर लोगों ने मार्च निकाला और दूरदर्शन केंद्र पहुंच कर मजदूरों को टावर खोलने से रोक दिया. इस प्रदर्शन में शामिल लोग कहते हैं कि यह मधेपुरा की अस्मिता के साथ-साथ देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में विदेशी वेब के दखल का भी है.
फेल साबित हुए है हाइपावर ट्रांसमिशन टावर . दूरदर्शन अधिकारियों द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि सोनवर्षा में हाइपावर ट्रांसमिशन टावर लगा दी गयी है. जिससे मधेपुरा सहित सिमरी बख्तियारपूर, खगड़िया व बंगाल में कलना लो पॉवर ट्रांसमिशन टावर की जरूरत नहीं है. इस तर्क में कोई दम नहीं है. क्योंकि हाईपावर ट्रांसमिशन हर जगह असफल है. भारत सरकार द्वारा एक सौकरोड़ खर्च कर पंजाब फजलिका में 11 वर्षों के निर्माण समय लगा कर एक हजार फीट की टेलीविजन टावर लगायी गयी और दावा किया गया कि अब पाकिस्तान में हमारी
टेलीविजन वेब ही चलेगी. लेकिन हुआ उलट. पाकिस्तान के वेब के दखल से पंजाब के लोग भी फजलिका टावर का प्रसारण नहीं देख सकते है. ठीक इसी तरह भारत का दूसरा सबसे बड़ा टेलीविजन टावर रामेश्वर में सफेद हाथी साबित हुआ. उपर से यह भी एक बड़ी सच्चाई है कि सोनबर्षा स्थित टॉवर एक तो ठीक से काम ही नहीं कर रहा है
और यहाँ तक की पावर फेल होने पर जेनेरेटर भी नहीं चलता हैं. इससे पूर्व 2012 में भी इसी तरह का आदेश जारी किया गया था लेकिन, स्थानीय लोगों के विरोध और दूरदर्शन टावर की तालाबंदी किए जाने के बाद यह फैसला वापस ले लिया गया था.
सड़क पर उतरे मधेपुरा के लोग, किया विरोध . गुरुवार को मधेपुरा युवा मोरचा के तत्वावधान में वार्ड आयुक्त मुकेश कुमार, ध्यानी यादव, दिनेश ऋषिदेव के नेतृत्व में लोग सड़क पर उतर गये. पैदल मार्च कर टावर हटाने के प्रयास का विरोध किया गया. वहीं दूरदर्शन केंद्र पहुंच कर मजदूरों को टावर खोलने से रोक दिया गया. आक्रोशित लोग जमकर नारेबाजी कर रहे थे.
लोगों ने कहा कि किसी भी शर्त पर टावर हटाने नहीं दिया जायेगा. विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से मो कारी, रूदल यादव, अमरेंद्र यादव, गुगल पासवान, हमेंद्र कुमार, बालकिशोर यादव, बलराम यादव, अनिल कुमार, सत्यम कुमार, राजीव कुमार, संदीप कुमार, प्रकाश
कुमार आदि शामिल थे.
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