जिले में मकर संक्रांति आज व कल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Jan 2016 5:32 AM (IST)
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मिथिला पंचांग के अनुसार 15 को मनायी जायेगी मकर संक्रांति मधेपुरा : मकर संक्रांति को सूर्य धनु राशि छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करता है और इसी काल से शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं. मकर संक्रांति के आते ही देवताओं की रात समाप्त हो जाती है. उत्तरायण शुरू हो जाता है. इस दिन […]
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मिथिला पंचांग के अनुसार 15 को मनायी जायेगी मकर संक्रांति
मधेपुरा : मकर संक्रांति को सूर्य धनु राशि छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करता है और इसी काल से शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं. मकर संक्रांति के आते ही देवताओं की रात समाप्त हो जाती है. उत्तरायण शुरू हो जाता है. इस दिन से ही लोग मलमास के कारण रुके हुए अपने शुभ कार्य शुरू करते हैं. यह मकर संक्राति ही बसंत ऋतु के आगमन का पूर्व सूचक है.
इस दिन तिल व गुड़ के बने खाद्य पदार्थ खाने की परंपरा है. तिलकुट व लाई बनाने के लिए तिल, गुड़, चूड़ा, मुढ़ी बाजार में करीब एक माह से ही अपनी जगह बनाये हुए हैं. किराना दुकान हो या चौक-चौराहे, हर जगह इन सामग्रियों की बिक्री हो रही है. परंपरागत अंगेरजी तिथि के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जायेगा. वहीं मिथिला पचांग के अनुसार गुरुवार को यह पर्व मनाया जायेगा.
दूध की मांग बढ़ी : मकर संक्रांति के अवसर पर दही खाने की परंपरा है. लेकिन इस बार दूध की कमी लोगों को खल रही है. स्थानीय स्तर पर उत्पादित दूध की कमी तो है ही इस कमी को पैकेट के दूध से किया जा रहा है. लोग पहले से ही दूध की बुकिंग करा चुके हैं.
मोदी पतंग की है विशेष डिमांड : इस वर्ष मकर संक्राति के अवसर पर मोदी पतंग का भारी डिमांड है. खास कर युवा वर्ग मोदी पतंग को खासे उत्साहित नजर आ रहे है. बाजार में जेनरल पतंग पांच रूपये से पंद्रह रूपये में बिक रहा है. वहीं मोदी पतंग का भारी डिमांड होने कारण इसकी कीमत बीस से तीस रुपये बतायी जाती है.
उत्तरदायित्व वहन का संकल्प : मकर संक्राति ही वसंत ऋतु के आगमन का पूर्व सूचक है. विद्वान पंडित दुर्गानंद झा उर्फ मालवी जी कहते हैं कि सूर्य का मकर राशि मे प्रवेश उनके पुत्र शनि द्वारा पिता के साथ रहने और पुत्र शनि द्वारा पिता सूर्य की सेवा करने का प्रतीक है. यही कारण है कि मकर संक्रांति के दिन पुत्र-पुत्री हाथ में तिल रख कर माता-पिता का उत्तरदायित्व वहन करने का संकल्प लेते हैं. प्राणों को हरने वाली शीत ऋतु के प्रकोप कम करने का संकेत इस दिन से होने लगता है.
खिचड़ी और घी : मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है. इन दिनो मे खिचड़ी खायी जाती है और दान मे भी दिया जाता है. खिचड़ी में देशी घी डाल कर खाने का प्रचलन है. उत्तर प्रदेश और बिहार में इन्हीं दिनों खिचड़ी का आहार शुरू हो जाता है.
उड़ाया जाता है पतग : राम इक दिन चग उड़ाई, इद्रलोक मे पहुची जाई. पडित पंकज ठाकुर कहते हैं कि भगवान राम द्वारा पतग उड़ाने का प्रसंग रामचरित मानस के बाल कांड में किया गया है. पूरे भारत मे इस दिन पतंग उड़ायी जाती है. मकर सक्रांति को पतंग पर्व के रूप मे मनाया जाता है.
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