दौरम मधेपुरा रेलवे स्टेशन: बिजली नहीं रहने पर ट्रेन के आने का नहीं होता है एनाउंस
Author Prabhat khabar digital desk
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मधेपुरा : दौराम मधेपुरा रेलवे स्टेशन की बदहाली की स्थिति जस की तस है और फिलहाल इसके सुधार को लेकर रेलवे का कोई साफ रुख नजर नहीं आ रहा है. हर रोज एक नई समस्या उभर कर सामने आती है. जिनका न तो निदान निकलता है न ही कोई कार्रवाई की जाती है. कर्मचारियों की […]
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मधेपुरा : दौराम मधेपुरा रेलवे स्टेशन की बदहाली की स्थिति जस की तस है और फिलहाल इसके सुधार को लेकर रेलवे का कोई साफ रुख नजर नहीं आ रहा है. हर रोज एक नई समस्या उभर कर सामने आती है. जिनका न तो निदान निकलता है न ही कोई कार्रवाई की जाती है.
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कर्मचारियों की अनियमितता, पीने के लिए स्वच्छ पानी का अभाव से लेकर स्टेशन परिसर के अंदर कचरे का लगा ढेर इसका उदाहरण है. इसके अलावा एक और बड़ी समस्या है. जिसको लेकर रेलवे प्रशासन मौन है. इससे हर रोज मधेपुरा दौराम के हजारों यात्री व कर्मचारी जूझते हैं.
मधेपुरा दौरम में कहने को तो जेनेरेटर की व्यवस्था है, लेकिन उसे सिर्फ रात के समय में ही चालू किया जाता है. दिन में चालू करने की अनुमति स्टेशन प्रबंधक को नहीं है. इस बाबत वहां के कर्मचारियों ने बताया कि समस्तीपुर से कई बार हमने इसकी शिकायत की व नोटिस भी भेजा है. लेकिन इसको लेकर कोई जवाब नहीं आया है.
बिजली नहीं रहने के कारण दिन में गाड़ियों के उद्घोषणा नहीं होती है. इसके कारण गाड़ियों के आने के बाद पूछताछ काउंटर पर लोगों का जमावड़ा लग जाता है. खासकर जब एक साथ दो गाड़ियां स्टेशन पर आकर रूकती तब यात्रियों के बीच भगदड़ मच जाती है और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.
स्टेशन के कर्मचारी भी इस बात को लेकर परेशान रहते हैं की सूचना किस तरह यात्रियों तक पहुंचाया जाए बताते चले मुख्यालय स्थित दौराम मधेपुरा स्टेशन प्रतिदिन लगभग लाख से डेढ़ लाख के बीच की आमदनी रेलवे को देती है. इसके बावजूद दौराम मधेपुरा की प्रति रेलवे की यह रवैया बेहद चिंताजनक व निंदनीय है.
यात्री सुभाष यादव बताते हैं हम लोग पढ़े लिखे नहीं हैं. कौन सी गाड़ी कहां जायेगी इसका पता हमलोगों को घोषणा से ही चलता है, लेकिन जब इस बात की घोषणा नहीं होती है तो बहुत असमंजस वाली स्थिति हमारे सामने उत्पन्न हो जाती है.
हमें पता ही नहीं चल पाता कि कौन सी गाड़ी पर हमें चढ़ना है. कई बार तो इस चक्कर में गाड़ी छूट भी जाती है. कई बार हम इधर पूछताछ काउंटर पर कतार में लगकर गाड़ी के बारे में पता कर रहे होते हैं और उधर गाड़ी खुल जाती है.
यात्रियों की भीड़ अगर ज्यादा बढ़ जाती है या एक समय पर दो गाड़ियां आती है, तो ऐसे विशेष परिस्थिति में मेमो लेकर जेनेरेटर चलाने का प्रावधान है.
पारसनाथ मिश्र, स्टेशन अधीक्षक, दौराम मधेपुरा
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