जगजीवन विद्यालय : हाथ में प्लेट लेकर बच्चे खुले में खाते हैं मध्याह्न भोजन

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मधेपुरा : शहर के जगजीवन विद्यालय में रोसोई व खाना खाने के लिए जगह नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. जगजीवन आश्रम में जहां एक तरफ रसोईघर की बदतर स्थिति होने के कारण खाना बनाने वालों रसोईया को परेशानी झेलने पड़ रही है, तो दूसरी ओर जगह नहीं […]

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मधेपुरा : शहर के जगजीवन विद्यालय में रोसोई व खाना खाने के लिए जगह नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. जगजीवन आश्रम में जहां एक तरफ रसोईघर की बदतर स्थिति होने के कारण खाना बनाने वालों रसोईया को परेशानी झेलने पड़ रही है, तो दूसरी ओर जगह नहीं होने के कारण खाना खाने में छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी होती है.

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विद्यालय के रसोईघर की स्थिति इस तरह हो गई है कि बारिश के मौसम में पानी के बुंदों के बीच खाना बनाना पड़ता है. बारिश के समय में किचन की छत टूटे होने के कारण खाना बनाने में रसोईयों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
वहीं खाने के लिए जगह नहीं मिलने के कारण छात्र-छात्राओं को हाथ में प्लेट लेकर खाना पड़ता है. कुछ छात्र जमीन पर नीचे में ही बैठ कर खाते है. इतनी परेशानी के बावजूद विभाग का आजतक इसपर नजर नहीं पड़ा है. एक तरफ छात्र-छात्राएं परेशानी में जीवन यापन कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर विभाग द्वारा सभी स्कूलों के समुचित सुविधा दिए जाने का दावा किया जा रहा है.
हाथ में खाने का प्लेट लेकर खाने से बर्बाद होता है भोजन : स्कूल में खाना खाने के लिए जगह नहीं होने के कारण बच्चों का हाथ में लेकर भोजन करना पड़ता है. इससे कई बार खाना गर्म होने के कारण बच्चे के हाथ से प्लेट छूट जाते हैं. इस कारण हर रोज काफी खाना बर्बाद हो रहा है.
एक भवन में चल रहे दो विद्यालय : बता दें कि जगजीवन स्कूल के भवन में दो स्कूलों का संचालन हो रहा है. जिसमे एक जगजीवन आश्रम है और दूसरा प्राथमिक शिक्षा संघ का विद्यालय है. एक भवन में दो स्कूल होने के साथ दो प्राचार्य भी हैं. वहीं दो विद्यालय होने के कारण छात्र-छात्राओं की संख्या दोगुनी हो जाती है.
इस वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है छात्रों को. इस बाबत पर जगजीवन आश्रम की प्रधानाध्यापिका चंदा कुमारी ने बताया कि कई बार आवेदन दिया गया है. विद्यालय के स्थिति को लेकर लेकिन कोई भी पहल नहीं दिख रहा है. उपर से एक विद्यालय में दो-दो विद्यालय चलाने में काफी परेशानी होती है.
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