लखीसराय में 'समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार' का आगाज; हलसी में बनेगा ग्रामीण हाट, जानें स्वरोजगार योजना का लाभ उठाने का पूरा तरीका
फोटो- जीविका दीदी के साथ डीएम शैलेंद्र कुमार | Prabhat Khabar Network
रक्षाबंधन पर बिहार सरकार ने 'समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार अभियान' के तहत 5 लाख महिलाओं के खातों में 600 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए. यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए है. जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया और लाभ उठाने के तरीके.
लखीसराय. रक्षाबंधन के अवसर पर बिहार सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को नई गति देने के लिए ‘समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार अभियान’ की शुरुआत की. बापू सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने अभियान का शुभारंभ किया. लखीसराय समाहरणालय स्थित मंत्रणा कक्ष में डीएम शैलेंद्र कुमार, डीडीसी सुमित कुमार, डीआरडीए निदेशक नीरज कुमार और जीविका की जिला परियोजना प्रबंधक अनिता कुमारी की मौजूदगी में जीविका दीदियां वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़ीं.
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5 लाख महिलाओं के खातों में 600 करोड़ रुपये हस्तांतरित
अभियान के तहत मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अंतर्गत 5 लाख महिला लाभार्थियों के आधार-संबद्ध बैंक खातों में कुल 600 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की. इसके अलावा जीविका निधि के माध्यम से 10 हजार महिला लाभार्थियों को ऋण भी वितरित किया गया. सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर उन्हें स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है.
योजना का लाभ लेने के लिए क्या करना होगा
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का लाभ लेने के लिए महिला आवेदक का बिहार की निवासी होना और जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ा होना जरूरी है. इच्छुक महिलाओं को सबसे पहले अपने गांव या पंचायत में संचालित जीविका समूह की दीदी, ग्राम संगठन या जीविका की स्थानीय टीम से संपर्क करना होगा. समूह से जुड़ी महिलाओं का नाम और विवरण जीविका के माध्यम से योजना के लिए दर्ज किया जाएगा.
आवेदन के लिए आधार कार्ड, आधार से जुड़ा बैंक खाता, मोबाइल नंबर, निवास संबंधी जानकारी और पासपोर्ट साइज फोटो जैसे दस्तावेज तैयार रखने होंगे. बैंक खाते में आधार सीडिंग और मोबाइल नंबर का सही तरीके से जुड़ा होना जरूरी है, ताकि सहायता राशि सीधे खाते में भेजी जा सके.
आवेदन और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया
जीविका समूह की बैठक में महिला की रुचि, परिवार की स्थिति और प्रस्तावित रोजगार या स्वरोजगार गतिविधि की जानकारी ली जाएगी. इसके बाद आवेदन का विवरण जीविका के संबंधित पोर्टल या विभागीय प्रक्रिया के माध्यम से दर्ज किया जाएगा. आवेदन जमा होने के बाद स्थानीय स्तर पर जीविका कर्मियों और संबंधित अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा.
सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र लाभार्थियों की सूची तैयार की जाएगी. स्वीकृति मिलने पर योजना की राशि लाभार्थी के आधार-संबद्ध बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित की जाएगी. लाभार्थी को राशि मिलने के बाद उसे स्वीकृत रोजगार गतिविधि, जैसे पशुपालन, कृषि आधारित काम, लघु व्यवसाय, दुकान, सिलाई-कढ़ाई, खाद्य प्रसंस्करण या अन्य स्वरोजगार में लगाने की सलाह दी जाएगी.
ऋण के लिए जीविका समूह के माध्यम से आवेदन
जीविका निधि के तहत ऋण लेने की इच्छुक महिलाओं को अपने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आवेदन करना होगा. समूह की बैठक में ऋण की जरूरत और प्रस्तावित कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी. समूह और ग्राम संगठन की अनुशंसा के बाद आवेदन संबंधित जीविका अधिकारियों को भेजा जाएगा. स्वीकृति मिलने पर ऋण की राशि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपलब्ध करायी जाएगी.
महिलाओं को ऋण लेने से पहले व्यवसाय की योजना, अनुमानित लागत, आय और किस्त चुकाने की क्षमता की जानकारी देनी होगी. ऋण का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए करना होगा, जिसके लिए आवेदन किया गया है.
आवेदन में परेशानी होने पर यहां करें संपर्क
योजना का लाभ लेने में किसी तरह की परेशानी होने पर महिलाएं अपने गांव की जीविका दीदी, स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष या सचिव, ग्राम संगठन, प्रखंड परियोजना प्रबंधक और जीविका कार्यालय से संपर्क कर सकती हैं. बैंक खाते में राशि नहीं आने पर पहले आधार सीडिंग, बैंक खाता सक्रिय होने और मोबाइल नंबर की जानकारी की जांच करानी चाहिए. किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को आवेदन या राशि दिलाने के नाम पर पैसे नहीं देने की सलाह दी गयी है.
हलसी में जीविका ग्रामीण हाट का निर्माण शुरू
प्रदेशभर में 112 ग्रामीण हाटों के निर्माण की घोषणा के तहत लखीसराय जिले के हलसी प्रखंड में भी जीविका ग्रामीण हाट के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया. ग्रामीण हाट के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है. इससे स्थानीय स्तर पर महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
‘नारी शक्ति से समृद्ध बिहार’ पुस्तक का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान ‘नारी शक्ति से समृद्ध बिहार’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया गया. पुस्तक में लखीसराय की उन ग्रामीण महिलाओं की प्रेरणादायक कहानियां शामिल हैं, जिन्होंने जीविका से जुड़कर आर्थिक कठिनाइयों को पीछे छोड़ा और ‘लखपति दीदी’ बनने का मुकाम हासिल किया. इन कहानियों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया.
गंगासराय में जीविका सुधा बिक्री केंद्र शुरू
इसी कड़ी में लखीसराय के बड़हिया प्रखंड स्थित गंगासराय गांव में जीविका सुधा बिक्री केंद्र का भी शुभारंभ किया गया. इसका उद्घाटन डीएम शैलेंद्र कुमार और डीडीसी सुमित कुमार ने किया. केंद्र का संचालन चमेली जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य प्रेमशीला देवी करेंगी. केंद्र के माध्यम से जीविका समूहों से जुड़े उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध होगा.
10 लाख जीविका दीदियों के घर सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में अगले मार्च तक 10 लाख जीविका दीदियों के घरों को सौर ऊर्जा से संचालित करने के लक्ष्य की घोषणा की. इसके साथ ही महिलाओं द्वारा संचालित महिला विश्वविद्यालय स्थापित करने की दिशा में भी सरकार की योजना बतायी गयी. अभियान के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है.
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