दिव्यांगता को दी मात, मछली पालन से लिखी सफलता की नई इबारत: नंदनामा के हीरा कुमार बने किसानों के रोल मॉडल

अपने पोखर के पास मछली पालन की देखरेख करता हीरा कुमार | Prabhat Khabar Network
Fish Farming Success Story: नंदनामा गांव के दिव्यांग युवा हीरा कुमार ने पारंपरिक खेती छोड़कर मछली पालन को अपना व्यवसाय बनाया. मत्स्य विभाग की मदद और वैज्ञानिक प्रशिक्षण से उन्होंने सफलता की नई इबारत लिखी है. अब वे क्षेत्र के दर्जनों किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.
Fish Farming Success Story: लखीसराय जिले के रामगढ़ चौक प्रखंड अंतर्गत नंदनामा गांव के रहने वाले एक दिव्यांग युवा ने अपने अटूट हौसले और दृढ़ संकल्प से साबित कर दिखाया है कि अगर हिम्मत हो तो कोई भी शारीरिक बाधा प्रगति के रास्ते में रोड़ा नहीं बन सकती. पिता अमरेंद्र सिंह के छोटे पुत्र और दोनों पैरों से निशक्त हीरा कुमार ने पारंपरिक खेती का ढर्रा छोड़कर मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाया. आज वे न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि क्षेत्र के दर्जनों किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं.
1 एकड़ तालाब से की शुरुआत, विभाग से मिली सहायता
हीरा कुमार ने अपने संघर्ष और सफलता की शुरुआत जिला मत्स्य विभाग के सहयोग से की:
- तालाब निर्माण: उन्होंने मत्स्य विभाग से संपर्क कर अपनी करीब 1 एकड़ जमीन पर तालाब की खुदाई करवाई.
- शानदार मुनाफा: पहले ही साल मछली पालन में बेहतर मुनाफा मिलने के बाद उन्होंने इसे ही अपना मुख्य पेशा बनाने का पक्का इरादा कर लिया.
कोलकाता में लिया वैज्ञानिक मत्स्य पालन का प्रशिक्षण
हीरा की लगन को देखते हुए मत्स्य विभाग ने उन्हें 10 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण के लिए 'आई केयर कैफ, कोलकाता' (I-CARE-CIFE) भेजा:
- वैज्ञानिक तकनीक सीखी: कोलकाता में देश के नामी मत्स्य वैज्ञानिकों ने उन्हें विभिन्न प्रजातियों की मछलियों के पालन, पानी की समय-समय पर गुणवत्ता जांच और मछलियों को बीमारियों से बचाने के कारगर उपाय सिखाए.
- सरकारी किट व सुविधाएं: प्रशिक्षण के बाद विभाग द्वारा उन्हें वाटर टेस्टिंग किट एवं अन्य जरूरी आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए.
- कारोबार का विस्तार: लौटकर हीरा ने 10 कट्ठा जमीन में एक और तालाब खुदवाया और वैज्ञानिक तरीकों से उत्पादन शुरू किया.
गांव के दर्जनों किसानों को मिली नई राह
हीरा की सफलता का असर यह हुआ कि नंदनामा गांव के कई अन्य किसान भी अब अपनी जमीनों पर या लीज (किराए) पर खेत लेकर मछली पालन की ओर रुख कर रहे हैं. गाँव में कृषि विविधीकरण (Agricultural Diversification) की एक नई लहर दौड़ गई है.
Fish Farming Success Story: "सिर्फ धान-गेहूं के भरोसे न रहें, हिम्मत से बदलें किस्मत": हीरा कुमार
अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए हीरा कुमार कहते हैं:
हीरा कुमार का संदेश: "जब मैं पहली बार खेत में तालाब खुदवा रहा था, तो गांव के कई लोगों ने मुझे मना किया था. लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी. किसान अगर वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन करें तो उनकी आमदनी कई गुना बढ़ सकती है, जिससे वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकते हैं. किसानों को सिर्फ धान-गेहूं तक सीमित न रहकर मछली, मुर्गी और बत्तख पालन भी करना चाहिए. सरकार इसके लिए प्रशिक्षण और अनुदान दोनों देती है, जिसका फायदा हर किसान को उठाना चाहिए."
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By Prabhat Khabar News Desk
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