किशनगंज-ठाकुरगंज सड़क का चौड़ीकरण किया जाना आवश्यक, आये दिन होती है दुर्घटनाएं
Author Prabhat khabar news desk
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सड़क दो देशों भारत और नेपाल के बीच परस्पर संबंधों को बनाए रखने के लिए यातायात का मुख्य साधन है.
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ठाकुरगंज
एक तरफ सरकार तेजी के साथ सडकों का जाल बिछा रही है साथ ही पुराने सडकों चौड़ीकरण किया जा रहा है लेकिन दूसरी ओर किशनगंज से तैयबपुर होते हुए ठाकुरगंज तक की लगभग 50 किमी सड़क के चौड़ीकरण की मांग ग्रामीण सालों से कर रहे है उसके बाद भी उस सडक की हालात जस की तस ही बनी हुई है. इस सडक से रोजाना सैंकडो गाड़ियां गुजरतीं है इसके साथ ही रोजाना कई भारी हाईवा वाहन, ट्रक आदि रेत हो या अन्य सामान भरकर इस रास्ते से गुजरते है. जिससे आये दिन इस सड़क पर दुर्घटना में लोगों को अपनी जान गंवानी पडती है. इस बाबत ग्रामीणों ने बताया की इस मार्ग पर रोजाना भारी वाहनों की अवाजाही की वजह से हमेशा सडक हादसों का खौफ बना रहता है. गौरतलब है कि पिछले कई वर्षो मै इस सड़क पर वाहनो की चपेट में आकर कई लोग अपनी जान गंवा चुके है.जिला मुख्यालय को सीधा नेपाल से जोड़ता है यह मार्ग
किशनगंज जिला मुख्यालय से सीमा पार नेपाल के जिला मुख्यालय जाना हो या नेपाल के समीपवर्ती हवाई अड्डे चन्द्रगढ़ी यही एक मात्र मार्ग है. ठाकुरगंज से किशनगंज तक की लगभग 50 किमी की दूरी है. बताते चले यह सड़क दो देशों भारत और नेपाल के बीच परस्पर संबंधों को बनाए रखने के लिए यातायात का मुख्य साधन है. लाखों की आबादी के परिचालन का इसपर बोझ है. आम नागरिकों से लेकर सीमा पर तैनात सीमा सशस्त्र बल यानी एसएसबी के लिए भी काफी महत्वपूर्ण इस सड़क पर तमाम लोग जिला मुख्यालय के लिए रोजाना सफर करते हैं.लेकिन सड़क की चौड़ाई कम होने की वजह से आवाजाही में परेशानी होती है. सड़क के किनारे किनारे जगह- जगह पर अतिक्रमण की समस्या भी है जो जाम जैसी समस्या और हादसों को आमंत्रण देता है,सड़क किनारे बसी है घनी आबादी
किशनगंज से ठाकुरगंज के 50 किमी के दायरे में लगभग एक दर्जन ऐसे स्थल है जहां सड़क के किनारे बस्तियां बस गई हैं. सड़क किनारे बस्तियां बसने से सड़क पर ही मवेशी बांध दिए जाते है. वहीं सड़क पर ही बच्चे खेलने लगते है जो दुर्घटना का कारण बनते जा रहे है. वही इस सड़क के किनारे ही कई जगहों पर हाट बाजार लगता है. वहां अतिक्रमण के कारण सुगम यातायात में समस्या होने लगी है
सड़क किनारे लगता है बाजार
केटीटीजे सड़क के किनारे न सिर्फ बड़ी संख्या में आबादी बसी है बल्कि कई बाजार भी इस तरह संचालित होते है की वहा सड़क और बाजार के बीच दुविधा पैदा हो जाती है. बेलवा, छतरगाछ, चिचुआबाड़ी, गौरीहाट, तैयबपुर जेसे बाजार पूरी तरह सड़क पर लगने लगा है , शाम के वक्त इन जगहों पर इतनी भीड़ जमा हो जाती है कि आवागमन तक बाधित हो जाता है.आपके शहर में
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