दिघलबैंक: प्राथमिक विद्यालय उत्तर कुढ़ेली में कृष्ण-राधा बनकर पहुंचे नन्हे-मुन्ने, बाल लीलाओं के मंचन ने मोहा मन

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कृष्ण और राधा बने स्कूल के बच्चे | Prabhat Khabar Network

सीमांचल के किशनगंज में प्राथमिक विद्यालय उत्तर कुढ़ेली में जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ. नन्हे-मुन्ने बच्चों ने कृष्ण-राधा बनकर अपनी प्रस्तुतियों से सभी का मन जीत लिया.

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सीमांचल के किशनगंज जिले अंतर्गत दिघलबैंक प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय उत्तर कुढ़ेली में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महापर्व की पूर्व संध्या पर भव्य और आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यालय के दर्जनों नन्हे-मुन्ने बच्चे भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के मनमोहक बाल स्वरूप में सज-धजकर पहुंचे. बच्चों के परिधान, मोर मुकुट, बांसुरी और उनकी मनमोहक प्रस्तुतियों ने विद्यालय परिसर में मौजूद शिक्षकों, अभिभावकों और ग्रामीणों का दिल जीत लिया.

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नन्हे कलाकारों ने मंचित कीं भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं

कार्यक्रम के दौरान प्राथमिक कक्षाओं के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया:

  • लीलाओं का सजीव चित्रण: नन्हे बच्चों ने माखन चोरी, कान्हा की बाल लीलाएं और राधा-कृष्ण के संवादों का जीवंत नाटकीय मंचन किया.
  • सांस्कृतिक मूल्यों की झलक: बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, अध्यात्म और धार्मिक समरसता की खूबसूरत झलक देखने को मिली.
  • प्रतिभागी बच्चों का सम्मान: शानदार अभिनय और आकर्षक वेशभूषा प्रस्तुत करने वाले सभी बाल कलाकारों को विद्यालय प्रबंधन की ओर से पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया.

सांस्कृतिक आयोजन से संस्कारों का रोपण: प्रधान शिक्षक विक्रम मिश्रा

समारोह को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधान शिक्षक विक्रम मिश्रा ने ऐसे आयोजनों के महत्व को रेखांकित किया:

  • विरासत का जीवंत दर्शन: प्रधान शिक्षक ने कहा कि भारत की वास्तविक पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं में निहित है. जब विद्यालयी परिवेश में बच्चे स्वयं इन पात्रों को जीते हैं, तो वे अपनी जड़ों और इतिहास से मजबूती से जुड़ते हैं.
  • व्यक्तित्व विकास: उन्होंने कहा कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ इस प्रकार के सांस्कृतिक उत्सव बच्चों के भीतर आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति क्षमता और नैतिक संस्कारों का विकास करते हैं.

कार्यक्रम में शिक्षकों की रही सक्रिय भागीदारी

आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:

  • शिक्षकों ने बढ़ाया उत्साह: सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान शिक्षक सुनील कुमार और शिक्षिका मारिया निज़ामी ने बच्चों का मार्गदर्शन किया और मंच पर उनका उत्साहवर्धन किया.
  • ग्रामीणों ने की सराहना: सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी विद्यालय में इस तरह के सुरुचिपूर्ण और रचनात्मक आयोजन की स्थानीय अभिभावकों और शिक्षाविदों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की.
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