कोचाधामन: 40 मत्स्य कृषकों का दल शैक्षणिक भ्रमण व ट्रेनिंग के लिए रवाना, DFO ने दिखाई हरी झंडी

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भ्रमण करते मत्स्य किसान | Prabhat Khabar Network

किशनगंज जिले में नीली क्रांति को बढ़ावा देने के लिए 40 मत्स्य कृषकों के दल को आधुनिक एमजे फार्म हाउस में वैज्ञानिक विधि से मछली पालन का प्रशिक्षण दिया गया. इस पहल का उद्देश्य किसानों की आय दोगुनी करना है. प्रगतिशील किसानों ने उन्नत तकनीक और लागत नियंत्रण के गुर सिखाए.

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किशनगंज जिले में नीली क्रांति को रफ्तार देने और किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से मत्स्य विभाग द्वारा एक विशेष पहल की गई है. कोचाधामन प्रखंड सहित जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के 40 चयनित मत्स्य कृषकों के दल को गुरुवार को एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण सह व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए रवाना किया गया. जिला मत्स्य पदाधिकारी सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी मनोज कुमार ने समाहरणालय/कार्यालय परिसर से किसानों के वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह शैक्षणिक दल अलता स्थित आधुनिक एमजे फार्म हाउस पहुंचा, जहां किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन की बारीकियों से रूबरू कराया गया.

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अलता के एमजे फार्म में हुआ तकनीकी प्रशिक्षण

शैक्षणिक दौरे के दौरान किसानों ने आधुनिक तालाबों और हैचरी प्रबंधन का मौके पर जाकर अध्ययन किया:

  • तालाबों का सूक्ष्म निरीक्षण: एमजे फार्म हाउस पहुंचे किसानों ने वहां बने अलग-अलग प्रजातियों के तालाबों, वॉटर एरिएशन सिस्टम और फीडिंग तकनीक को करीब से देखा.
  • प्रगतिशील किसानों ने साझा किए टिप्स: फार्म संचालक सह प्रगतिशील मत्स्य पालक मुजफ्फर कमाल सवा और शाएक अंजुम ने किसानों को पंगास, देशी रोहू (रेहू), कतला, नैनी और कॉमन कार्प जैसी व्यावसायिक प्रजातियों के संवर्धन के गुर सिखाए. उन्होंने बताया कि किस प्रकार संतुलित आहार और पानी की गुणवत्ता का ध्यान रखकर कम लागत में अधिकतम उत्पादन हासिल किया जा सकता है.

उन्नत मत्स्य पालन के प्रमुख बिंदु

प्रशिक्षण सत्र के दौरान किसानों को दी गई मुख्य तकनीकी जानकारियां:

विषय (Category)प्रमुख तकनीकी पहलू (Key Technical Insights)
मछली प्रजातियांपंगास, देशी रोहू, कतला, नैनी व कार्प का मिश्रित पालन
लागत नियंत्रणवैज्ञानिक फीड प्रबंधन व घर पर दाना तैयार करने की विधि
तालाब निर्माणमिट्टी की जांच, सही ढलान, गहराई व जल निकासी की व्यवस्था
सरकारी अनुदाननए तालाब निर्माण, बोरिंग व फीड मिल पर विभागीय सब्सिडी
रोग नियंत्रणसमय-समय पर पानी में चूना, पोटाश व ऑक्सीजन स्तर का संतुलन

मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाएं: मत्स्य विकास पदाधिकारी

प्रशिक्षण स्थल पर मौजूद योजना प्रभारी सह मत्स्य विकास पदाधिकारी ललित नारायण साह ने किसानों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी:

  • अनुदानित योजनाएं: उन्होंने किसानों को बताया कि राज्य व केंद्र सरकार नए तालाब की खुदाई, सोलर पंप सेट और फीड मिल की स्थापना पर भारी अनुदान दे रही है.
  • स्वरोजगार का बड़ा जरिया: उन्होंने कृषकों का आह्वान किया कि वे मत्स्य पालन को केवल पारंपरिक काम न मानकर एक पूर्ण व्यावसायिक मॉडल के रूप में अपनाएं, जिससे स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें.
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