पुल नहीं तो अंतिम सफर भी मुश्किल, शव को कंधे पर लेकर उफनती नदी पार करते हैं ग्रामीण
फोटो- मृत व्यक्ति के शव को कंधे पर लेकर खकवा नदी पार कर कब्रिस्तान तक जाते हैं लोग
किशनगंज में पुल की कमी के कारण ग्रामीणों को भीषण समस्या का सामना करना पड़ रहा है. बरसात में उफनती नदी को शवों के साथ कंधे पर लादकर पार करना पड़ता है, जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.
बहादुरगंज (किशनगंज). आजादी के इतने वर्ष गुजर जाने के बाद भी एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है, जो व्यवस्था और विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है. यहां जिंदगी के आखिरी सफर के दौरान भी लोगों को एक अदद पुल के अभाव में मृत व्यक्ति के शव को कंधे पर लेकर खकवा नदी पार कर कब्रिस्तान तक जाना पड़ता है. मामला बहादुरगंज के नोदिया टोली-बैसा घाट का है. नदी घाट पर पुल नहीं होने से आसपास के दर्जनभर गांवों के ग्रामीणों को अपने मृत परिजनों के जनाजे को कब्रिस्तान तक पहुंचाने के लिए बरसात के मौसम में जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है.
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सड़क हादसे में मृत युवती के जनाजे के दौरान सामने आई दर्दनाक तस्वीर
इस समस्या की भयावह तस्वीर उस समय सामने आई, जब सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाली 20 वर्षीय शहंसवी बेगम, पिता सईदुर रहमान, निवासी बीरपुर के शव को मिट्टी देने के लिए खकवा नदी पार कर बैसा कब्रिस्तान ले जाना पड़ा. मृतका के अंतिम सफर में शामिल दर्जनों लोग भी शव के साथ नदी पार करते नजर आए. बरसात के मौसम में नदी में उतरकर शव को दूसरी ओर कब्रिस्तान तक पहुंचाने का दृश्य किसी दुखद परिदृश्य से कम नहीं था.
दर्जनभर गांवों के लिए एकमात्र कब्रिस्तान
बताया जाता है कि करीब 50 एकड़ में फैले बैसा कब्रिस्तान से नोदिया टोली, चकचकी, झींगाकाटा इस्तमरार, झींगाकाटा तौफीर, दोगाछी, झींगाकाटा, दर्जी टोला, लाटटोला, बैसा, तेघरिया और धापरटोली समेत दर्जनभर गांव जुड़े हुए हैं. यह क्षेत्र के लोगों के लिए प्रमुख और एकमात्र कब्रिस्तान है, जहां वर्षों से दर्जनभर गांवों के लोग अपने मृत परिजनों को दफनाते आ रहे हैं.
बरसात में उफनती नदी बना देती है अंतिम सफर को और खतरनाक
ग्रामीणों के अनुसार बरसात के दिनों में खकवा नदी उफान पर रहती है. ऐसे समय में नदी पार कर कब्रिस्तान तक पहुंचना बेहद कठिन और जोखिम भरा हो जाता है. इसके बावजूद पुल नहीं होने के कारण लोगों के पास कोई आसान विकल्प नहीं है. एक बड़ी आबादी को बरसात के दिनों में शव को कंधे पर लेकर पानी में उतरना पड़ता है और नदी पार कर दूसरी ओर कब्रिस्तान तक पहुंचना पड़ता है.
ग्रामीण बोले, कई बार की मांग लेकिन मिला सिर्फ आश्वासन
अपनी इस नियति से परेशान ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी इस घाट पर पुल का निर्माण नहीं होना सरकारी उदासीनता और लापरवाही को दर्शाता है. ग्रामीणों ने बताया कि गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन आश्वासन के अलावा अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं मिला.
जिला पार्षद प्रतिनिधि बोले, कई बार हो चुका है स्थल निरीक्षण
मामले में जिला पार्षद प्रतिनिधि इमरान आलम ने कहा कि पुल निर्माण को लेकर ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों की ओर से कई बार स्थल निरीक्षण किया गया है. उन्होंने बताया कि बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री से पटना स्थित कार्यालय में मिलकर भी पुल निर्माण की आवश्यकता से अवगत कराया गया है. बावजूद इसके खकवा नदी पर पुल निर्माण की दिशा में अब तक ठोस प्रगति नहीं हो सकी है.
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