प्रभु केवल माला से प्रसन्न नहीं होते

Published at :05 Jan 2017 5:48 AM (IST)
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प्रभु केवल माला से प्रसन्न नहीं होते

प्रवचन . पांच दिवसीय रामचरित मानस व गीता ज्ञान के दूसरे दिन बोलीं साध्वी अमृता ठाकुरगंज : आज मानव जीवन ईमानदारी व नैतिकता से पूर्ण नहीं बन पा रहा है. मनुष्य कर्म फल पर विश्वास न कर गलत तरीकों से जल्द ही सफल व संपन्न होना चाहते हैं. गीता व्यावहारिक जीवन के साथ कर्मयोग को […]

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प्रवचन . पांच दिवसीय रामचरित मानस व गीता ज्ञान के दूसरे दिन बोलीं साध्वी अमृता

ठाकुरगंज : आज मानव जीवन ईमानदारी व नैतिकता से पूर्ण नहीं बन पा रहा है. मनुष्य कर्म फल पर विश्वास न कर गलत तरीकों से जल्द ही सफल व संपन्न होना चाहते हैं. गीता व्यावहारिक जीवन के साथ कर्मयोग को जोड़ती है. अपने कर्मों को अच्छा बनाओ, संभालो और सुधारो. अच्छे कर्म ही प्रभु की सच्ची भक्ति, पूजा और प्रार्थना है. प्रभु माला व माल से प्रसन्न नहीं होते वे तो अच्छे कर्मों से ही प्रसन्न होते हैं. गीता निष्काम कर्मों के द्वारा ही मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताता है. उक्त बातें साध्वी अमृता भारती ने कही. वे दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित पांच दिवसीय श्री रामचरित्र मानस व गीता ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रही थीं. ठाकुरगंज गांधी मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को आशुतोष जी महाराज की
विदुषी शिष्या अमृता भारती ने संबोधित करते हुए कहा कि एक अच्छे शिष्य, समाज व विश्व का निर्माण एक आध्यात्मिक महापुरुष द्वारा ही संभव है. आज मानव स्वार्थवश अपना आदर्श व आचरण खो चुका है. संत महापुरुष अपने संपर्क में आने वाले प्रत्येक मानव को नि:स्वार्थी बनाते हैं. प्रत्येक मानव को अपने भीतर छिपी शक्तियों को जागृत करना चाहिए. उन्होंने कहा यदि मनुष्य को अपना जीवन सुखी शांत, प्रसन्न व आनंददायक बनाना है, तो उसे यही सब बातें दूसरों के लिए भी करनी होंगी. यदि उसे भगवान की दया चाहिए तो दूसरों पर दया करनी होगी. दया चाहिए पर करते नहीं, यह विरोधाभास चलने वाला नहीं है. वहीं स्वामी श्री सकर्मानंद जी ने कहा की कर्म करने के लिए मनुष्य स्वतंत्र है चाहे कर्मो के द्वारा मोक्ष प्राप्ति करें या कर्मो के द्वारा 84 लाख योनियों के बंधन में बंध जाये. स्वामी जी के अनुसार विचारों की सार्थकता ही सुख-दुःख की चरम सीमा तक ले जाता है. उनके अनुसार एक व्यक्ति के अंदर जब विचारों का बवंडर चलता है तो वही विचार ही कर्मों तक आगे बढ़ने को विवश कर देता है और मनुष्य कर्म करते हुए जीवन की गति को आगे बढ़ता है. कर्म अच्छे हो या बुरे दोनों ही कर्म बंधन है. अच्छे कर्म सोने की जंजीर है तो बुरे कर्म लोहे की जंजीर है. स्वामी जी के अनुसार कर्मों के कार्य ने आज तक किसी को नहीं छोड़ा है. इस दौरान साध्वी महामाया भारती भी मौजूद थीं. वही बुधवार को पूर्व विधायक गोपाल अग्रवाल, देवकी अग्रवाल, गोपाल केजरीवाल, आमोद कुमार साह आदि मौजूद थे. कार्यक्रम की सफलता के लिए विनोद सिंह, रवीन्द्र राय, प्रयाग साह, प्रदीप साह, दिलीप, संतोष सिंह, बंगाली सहनी आदि सक्रिय दिखे.
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