535 करोड़ की सड़क पर घुटने भर पानी! खगड़िया-सहरसा को जोड़ने वाली 'सोनमनकी-डेंगराही' परियोजना का हाल बेहाल

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Sonmanki Dengarahi Road Project AI Image

खगड़िया और सहरसा को जोड़ने वाली 535 करोड़ रुपये की सोनमनकी-डेंगराही सड़क परियोजना सरकारी सुस्ती का जीता-जागता उदाहरण बन गई है. करोड़ों खर्च के बावजूद जनता जर्जर सड़क पर नाव और बांस के पुल से सफर करने को मजबूर है, और अवैध वसूली का शिकार हो रही है.

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खगड़िया और सहरसा जिले को आपस में जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी 'सोनमनकी-डेंगराही सड़क परियोजना' सरकारी सिस्टम की सुस्त कार्यप्रणाली का जीता-जागता उदाहरण बन गई है. करीब 534.67 करोड़ रुपये की इस परियोजना पर करोड़ों खर्च होने के बावजूद आज भी लोगों को बदहाल और जर्जर सड़क नसीब हो रही है. झीमा-सर्वजीता मार्ग पर झीमा के समीप स्थिति इतनी भयानक हो चुकी है कि टूटी सड़क पर घुटने भर पानी जमा होने के कारण लोगों को आवागमन के लिए नाव और बांस के अस्थायी पुल का सहारा लेना पड़ रहा है, और इसके लिए अवैध रूप से टोल (किराया) की वसूली भी की जा रही है.

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2020 में होना था पूरा, आज भी अधूरा है काम

खगड़िया और सहरसा की लाइफलाइन मानी जाने वाली इस परियोजना का हाल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है:

  • लक्ष्य से भटकी योजना: 534.67 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना वर्ष 2013 में शुरू हुई थी और इसे 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य था. लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी यह अधूरी है.
  • सड़कों की खस्ता हालत: सोनमनकी पुल से सर्वजीता तक (करीब 6 किमी) और सोनमनकी से आनंदपुर मारन तक (करीब 9 किमी) की सड़क जगह-जगह से जर्जर है. झीमा के पास तो सड़क का एक बड़ा हिस्सा बह ही गया है.

टूटी सड़क पर बांस का पुल, मजबूर जनता से हो रही वसूली

झीमा के समीप जलजमाव वाले हिस्से से गुजरना अब किसी सजा से कम नहीं है:

  • बांस का अस्थायी पुल: पानी से भरे गड्ढे को पार करने के लिए स्थानीय स्तर पर एक अस्थायी बांस का पुल बनाया गया है, जिसके इस्तेमाल पर लोगों से खुलेआम अवैध वसूली की जा रही है.
  • तय कर दिया गया है रेट: पैदल यात्रियों से 10 रुपये, दोपहिया वाहन से 20 रुपये और चारपहिया वाहन पार कराने के लिए 50 रुपये तक वसूले जा रहे हैं.
  • क्या है तर्क? किराया वसूलने वालों का बेतुका तर्क है कि उन्होंने पानी में ईंटें डाली हैं और बांस खरीदकर पुल बनाया है, इसलिए लागत वसूलने के लिए यह पैसा लिया जा रहा है.

415 करोड़ का महासेतु बन रहा, लेकिन संपर्क मार्ग जर्जर

इस परियोजना के तहत 414.74 करोड़ रुपये की लागत से डेंगराही घाट महासेतु का निर्माण भी हो रहा है. इसके अलावा सोनमनकी, खैरी धार, बेलदरवा सोती, सुगरकोल और हेलनाधार में हाई लेवल पुल बनाए गए हैं. दावा है कि इससे दोनों जिलों के बीच की दूरी 35 किलोमीटर कम हो जाएगी. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब पुलों तक पहुंचने वाली एप्रोच रोड ही जर्जर और जलमग्न रहेगी, तो इतने भारी-भरकम बजट के महासेतु का लाभ आम जनता को कैसे मिलेगा?

किसानों और छात्रों की फजीहत, प्रशासन से मरम्मत की मांग

बारिश के दिनों में सड़क की हालत नरक जैसी हो जाती है. अपनी उपज को बाजार ले जाने वाले किसान, कीचड़ से गुजरने वाले स्कूली छात्र और अस्पताल जाने वाले मरीज भारी मुसीबत झेल रहे हैं. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल झीमा के पास टूटी सड़क की मरम्मत कराने, जलजमाव का स्थायी समाधान निकालने और अवैध किराया वसूली पर सख्त रोक लगाने की मांग की है.

जनता का सीधा सवाल है: जब सड़क परियोजना पर करोड़ों खर्च हो चुके हैं, तो क्या जनता का नसीब सिर्फ टूटी सड़क, नाव और बांस का पुल ही है?


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