खगड़िया में बाढ़ का पानी घटने लगा, 37,955 परिवार प्रभावित, राहत कार्य जारी
फोटो- बाढ़ राहत शिविर में मरीजों का इलाज करते स्वास्थ्य कर्मी. | Prabhat Khabar Network
खगड़िया में बाढ़ का पानी अब घटने लगा है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है. 37,955 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं. जिला प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और जलमग्न क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है.
खगड़िया. जिले में बाढ़ की स्थिति में अब धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं. विभिन्न क्षेत्रों में जलस्तर में कमी दर्ज की जा रही है. हालांकि, पानी घटने के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों में खतरा पूरी तरह टला नहीं है. जिला प्रशासन ने लोगों से जलस्तर कम होने के बाद जल्दबाजी में जलमग्न या क्षतिग्रस्त क्षेत्रों की ओर नहीं जाने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है.
चार अंचलों की 20 से अधिक पंचायतों में रहा बाढ़ का असर
जिला प्रशासन के अनुसार सदर, परबत्ता, गोगरी और मानसी अंचलों की 20 से अधिक पंचायतों एवं शहरी निकायों में बाढ़ का असर रहा. इससे 37,955 परिवारों की कुल 1,63,159 आबादी प्रभावित हुई है. इनमें खगड़िया अंचल में 63,591 और परबत्ता अंचल में 51,282 लोग प्रभावित हुए हैं.
बोरना, रहीमपुर मध्य, रहीमपुर दक्षिणी, रहीमपुर उत्तरी और माधवपुर पंचायतों में बाढ़ का व्यापक प्रभाव रहा, जबकि कई अन्य पंचायतें और वार्ड आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं.
50 सामुदायिक रसोई से 2.77 लाख लोगों को मिला भोजन
बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए जिले में दो बाढ़ राहत केंद्र और 50 सामुदायिक रसोई लगातार संचालित की जा रही हैं. इनके माध्यम से अब तक 2,77,850 लोगों को गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया है. विस्थापित और खुले में रह रहे परिवारों के बीच 28,088 पॉलीथीन शीट और 7,176 ड्राई राशन पैकेट भी वितरित किये गये हैं. पशुधन की सुरक्षा के लिए विभिन्न अंचलों में 697.66 क्विंटल पशुचारा उपलब्ध कराया गया है.
166 चापाकल और 127 अस्थायी शौचालय स्थापित
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता की व्यवस्था के लिए 166 नए चापाकल और 127 अस्थायी शौचालय स्थापित किये गये हैं. स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार उपलब्ध रखने के लिए 59 दैनिक स्वास्थ्य केंद्र सक्रिय हैं. सुदूर और जलमग्न क्षेत्रों से मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए आठ विशेष बोट एंबुलेंस तैनात की गयी हैं. वहीं बचाव और आवागमन की सुविधा के लिए बेलदौर, गोगरी, खगड़िया, मानसी और परबत्ता में कुल 166 सरकारी एवं अधिग्रहित नावों का परिचालन किया जा रहा है.
जलस्तर घटने के दौरान भी सावधानी जरूरी
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि पानी कम होने के बावजूद तेज बहाव वाले नालों, नदियों और जलमग्न रास्तों को पार करने का प्रयास न करें. क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों और तटबंधों के आसपास अनावश्यक रूप से जाने से बचें. यदि बिजली के पोल, तार या अन्य विद्युत उपकरण पानी के संपर्क में हों तो उनसे दूरी बनाकर रखें. बच्चों को विशेष रूप से जलजमाव और गहरे पानी वाले स्थानों से दूर रखने की अपील की गयी है.
घर लौटने से पहले करें सुरक्षा की जांच
राहत शिविरों से घर लौटने वाले परिवारों को प्रशासन की सलाह और स्थानीय स्थिति का आकलन करने के बाद ही वापस लौटने को कहा गया है. घर में प्रवेश करने से पहले भवन की संरचनात्मक स्थिति की जांच करने की सलाह दी गयी है. प्रशासन ने लोगों से दूषित या गंदे पानी का सेवन नहीं करने और पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित होने तक केवल सुरक्षित पेयजल का इस्तेमाल करने की अपील की है.
24 घंटे निगरानी, अफवाहों से बचने की अपील
जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर 24 घंटे लगातार निगरानी रखी जा रही है. प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है. किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करने की सलाह दी गयी है. प्रशासन का कहना है कि जलस्तर में कमी के बावजूद राहत और बचाव कार्य लगातार जारी रहेंगे.
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