कभी भी ध्वस्त हो सकता है पुल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :17 May 2016 6:03 AM (IST)
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समस्या. कोसी की तेज धार के आगे जुगाड़ पुल लाचार डुमरी में कोसी नदी में बने जुगाड़ पुल पर मंडराने लगा संकट के बादल, मरम्मत में जुटे जुगाड़ पुल के रहनुमा कोसी नदी पर बनाये गये जुगाड़ पुल पर खतरा मंडरा रहा है. जानकारों की मानें तो जुगाड़ पुल पर आवागमन कभी भी बंद हो […]
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समस्या. कोसी की तेज धार के आगे जुगाड़ पुल लाचार
डुमरी में कोसी नदी में बने जुगाड़ पुल पर मंडराने लगा संकट के बादल, मरम्मत में जुटे जुगाड़ पुल के रहनुमा
कोसी नदी पर बनाये गये जुगाड़ पुल पर खतरा मंडरा रहा है. जानकारों की मानें तो जुगाड़ पुल पर आवागमन कभी भी बंद हो सकता है. जब तक कोसी की कृपा है आवागमन हो रहा है. इधर, पुल पर खतरा मंडराने के बाद जुगाड़ पुल के ग्रामीण इंजीनियर मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर कर रहे हैं. लेकिन कोसी की लहरों के आगे इसका बच पाना मुश्किल लग रहा है.
खगड़िया/बेलदौर : नाव को जोड़ कर कोसी नदी पर बनाये गये जुगाड़ पुल पर खतरा मंडरा रहा है. जानकारों की मानें तो जुगाड़ पुल पर आवागमन कभी भी बंद हो सकता है. जब तक कोसी की कृपा है आवागमन हो रहा है. इधर, पुल पर खतरा मंडराने के बाद जुगाड़ पुल के ग्रामीण इंजीनियर मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर कर रहे हैं. लेकिन कोसी की लहरों के आगे इसका बच पाना मुश्किल लग रहा है. ऐसे में स्थानीय लोग अभी से आवागमन के संकट को भांप परेशान हैं. बता दें कि कोसी इलाके के लाखों की आबादी के लिये डुमरी पुल लाइफलाइन मानी जाती है. लेकिन बीते दिनों पुल क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद नावों को जोड़ कर जुगाड़ पुल बनाया गया था. लेकिन हर वर्ष की तरह इस बार भी कोसी की फुफकार शुरू हो चुकी है.
बढ़ेगा जलस्तर तो बंद हो जायेगा परिचालन
थोड़ी राहत मिलती है कि कोसीवासियों की मुसीबतें बढ़ जाती है. नदी के बढ़ रहे जलस्तर देख उफान का भय सताने लगा है. वहीं नाव पुल संचालक भी इससे निपटने के लिये हरसंभव कोशिश में लगे हुए हैं. बीते एक पखवारे से नदी के जलस्तर में धीमी गति से बढ़ोतरी हो रही है. पुर्वानुमान से सशंकित नाविक अपने पुल में लगाये नावों एवं एप्रोच पथ को बचाने में पूरी ताकत झोंके हुए हैं. दो भाग में बने नाव पुल के बीच लगभग 250 फीट एप्रोच पथ को लगभग दो मीटर ऊंचा करने के लिये लगातार सैंडबैग बिछाये जा रहे है. ताकि कुछ दिनों और जुगाड़ पुल पर परिचालन होता रहे.
एप्रोच पथ पर बालू से बचाव करते मजदूर व जुगाड़ पुल पर गाड़ी को धक्का देते लोग.
जुगाड़ के सहारे चल रही जिंदगी
बीते एक जनवरी 2015 को भी 42 नावों को जोड़कर नाविकों ने जुगाड़ पुल का निर्माण कर 23 मई तक आवागमन कराया था. जिसमें नाविकों को लागत मूल्य के अलावे काफी मुनाफा भी हुआ था. लेकिन वर्ष 2016 के 15 फरवरी को नाविकों ने नदी की चौड़ाई बढ़ जाने के कारण 80 नावों को दो पार्ट में जोड़कर जुगाड़ पुल बनाया है. इस बार नाव संचालकों को इसके निर्माण में दुगुनी लागत लगी है तो वही परिचालन के लिये समय भी कम मिल रहा है.
जिसके कारण नाविकों को भारी नुकसान होने की चिंता सता रही है . संभावित बाढ़ की संभावनाओं से लोगों को भी नदी पार करने में उत्पन्न होने वाली समस्या अभी से ही सताने लगी है. नाविकों का दावा है कि नदी के जलस्तर मे 2 मीटर तक की बढ़ोतरी हो जाने के बाद भी जुगाड़ पुल पर वाहनों के परिचालन कराये जाने में कोई खतरा नहीं है. इसको लेकर सभी आवश्यक तैयारी पूरी कर ली गयी है.
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