फसलों को खेत में जलाने से होता है जन जीवन व पर्यावरण को नुकसान
Author Prabhat khabar digital desk
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खगड़िया : फसलों को खेत में जलाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. रबी हो या खरीफ मौसम. इन दोनों मौसम में जिले के अधिकांश किसान बेकार पड़े फसलों को खेत से हटाने की जगह उसे खेतों में ही जला देते हैं. शायद जिले के हजारों किसान इस बात से अंजान हैं कि […]
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खगड़िया : फसलों को खेत में जलाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. रबी हो या खरीफ मौसम. इन दोनों मौसम में जिले के अधिकांश किसान बेकार पड़े फसलों को खेत से हटाने की जगह उसे खेतों में ही जला देते हैं. शायद जिले के हजारों किसान इस बात से अंजान हैं कि फसलों को खेत में जलाना खतरनाक है. ऐसा करने से न सिर्फ खेतों की उर्वराशक्ति प्रभावित होती है, बल्कि मानव स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिये भी यह
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हानिकारक है.
खेतों में फसलों के जलाने की वर्षों पुरानी प्रथा को समाप्त करने के लिये कृषि विभाग के द्वारा विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया है. जिला कृषि पदाधिकारी दिनकर प्रसाद सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत जिले के तमाम किसानों को फसल जलाने से होने वाले नुकसान की जानकारी के साथ-साथ अवशेष/बेकार फसलों का इस्तेमाल उर्वरक बनाने में करने को कहा जाएगा.
गौरतलब है कि खरीफ फसल में बड़ी संख्या में जिले के किसान धान व मक्के की कटनी के बाद अक्तूबर-नवम्बर माह में धान के पुआल व मक्के के पौधे को खेत में जला देते हैं. इसी तरह रबी मौसम में गेहूं व मक्के की कटनी के बाद अप्रैल व जून माह में गेहूं के भूसे व मक्के के पौधों को जलाते हैं. डीएओ बताते हैं कि अब बेकार फसलों को खेतों में जलाने से रोकने के लिये किसानों को जागरूक किया जाएगा.
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